सालभर में 500 से ज्यादा शवों का दाह संस्कार:चिताओं की आग से धुंधला जाती हैं आंखें, पीपीई किट की गर्मी में उबल जाते हैं फिर भी कर्म से पीछे नहीं हट रहे
मुक्तिधाम की कहानी: संक्रमण काल में जब परिवार के सदस्य शव को कंधा नहीं दे पा रहे हैं तो ये आगे आ रहे,इनका न बीमा हुआ है और न ही पर्याप्त वेतन मिलता है
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