पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अफसरों ने अपने फायदे और पसंदीदा एजेंसी को 11.84 कराेड़ रुपए का टेंडर देने के लिए फाइल पर विभागीय मंत्री की मंजूरी को ही बदल दिया। मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने यह गड़बड़ी पकड़ने के बाद सचिव प्रशांत कुमार को शोकॉज किया है। साथ ही अधिकारियों के खिलाफ आरोप गठित करने का आदेश दिया है। उन्होंने पूछा है कि मैंने फाइल में जिस बिडिंग डॉक्यूमेंट को मंजूरी दी है, उसमें छेड़छाड़ कैसे हो गई? फाइल के तथ्यों में कैसे बदलाव किया गया? दो दिनों में स्पष्टीकरण दें।
दरअसल, यह मामला पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल-01 धनबाद से जुड़ा हुआ है। वहां 77 एमएलडी के शहरी जलापूर्ति योजना के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए टेंडर आमंत्रित की गई। फाइल में जिन शर्तों पर मंत्री ने मंजूरी दी, उनमें से कुछ शर्तों में अफसरों ने बदलाव कर दिया और टेंडर भी जारी कर दिया। गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद अब टेंडर पर रोक लगा दी गई है।
आगे क्या- नए सिरे से होगी टेंडर कमेटी मीटिंग
टेंडर पर रोक के बाद अब फिर से प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इसके तहत स्क्रूटनी, टेंडर कमेटी के साथ मीटिंग, रेट खोलने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें जो कंपनी एल-वन पाया जाएगा, उसे ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम मिलेगा। जिस कंपनी को टेंडर मिलेगा, वह तीन साल तक ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का काम देखेगी।
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