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पापुनि के लिए बरसों से पुस्तकें छाप रहीं पांच फर्म ब्लैकलिस्टेड, अब टूटा वर्चस्व

छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने पांच फर्माें को 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है। ये फर्म बरसों से पापुनि के लिए पुस्तकें छाप रही हैं। इन पांचों में शामिल एक फर्म का तो पापुनि में एक तरह वर्चस्व था। बड़े ठेके उसी फर्म को मिलते थे। इन पांचों फर्म के संचालकों को राज्य में सत्ता परिवर्तन के पहले तक यहां पदस्थ रहे प्रभावशाली अफसरों का खासा करीबी माना जाता है। इस वजह से ठेके इन्हीं फर्म को मिलते रहे। अब उन अफसरों को यहां से हटाने के बाद फर्म को भी 3 साल के लिए ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। पापुनि के अफसरों के अनुसार अलग-अलग तरह की अनियमितता की शिकायतों के कारण फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया है।
पाठ्यपुस्तक निगम के चेयरमैन शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बताया कि इन फर्मों के बारे में शिकायत मिली थी। उसकी जांच के लिए निगम की देखरेख में समिति बनायी गई। समिति ने प्राप्त शिकायतों की जांच की। उसकी रिपोर्ट के आधार पर पांच फर्मों टेक्नो प्रिंट्स, प्रगति प्रिंटर्स, रामराजा प्रिंटर्स, श्रीराम प्रिंटर्स और शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स को काली सूची में डाला गया है। इन पांच फर्म में एक-दो तो ऐसी हैं, जिन्हें हर बड़े टेंडर मिलते रहे हैं। ये भी चर्चा है कि पिछली सरकार में प्रभावशाली रहे कुछ अफसरों का इन फर्म को संरक्षण था। उन्हीं की वजह से ठेके उन्हीं चुनी हुई फर्म को मिलते रहे। हालांकि पिछले कुछ वर्ष से पाठ्यपुस्तक निगम में किताबों की छपाई को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। कई स्तर पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। राज्य बदलने के बाद जांच के बाद कार्रवाई की गई है। पापुनि के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी मंगलवार को भविष्य की प्लानिंग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया इस बार किताबों के कागज बीते वर्षों के मुकाबले बेहतर होंगे। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी अच्छे पन्नों पर छपी किताबें मिलेंगे। साथ ही कागज में आर-पार दिखने की शिकायत भी खत्म हो जाएगी। कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने बताया कि 2016 में उन्होंने आरटीआई में मिले दस्तावेजों के आधार पर भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ किया था। अब जाकर चार साल की मेहनत सफल हुई। कांग्रेस सरकार आने के बाद उनकी शिकायत पर जांच हुई और फर्मों को ब्लैक लिस्ट किया गया।

जांच में मिली अनियमितता और गड़बड़ी
पाठ्यपुस्तक निगम के अधिकारियों ने बताया कि मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स रायपुर के विरूद्ध शिक्षा सत्र 2020-21 में जमा की गई 20 लाख की बैंक गारंटी के संबंध में विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। तथ्यों की जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई। इसलिए इस फर्म को तीन वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया। इसी तरह टेक्नो प्रिंट्स, प्रगति प्रिंटर्स, रामराजा प्रिंटर्स और मेसर्स श्रीराम प्रिंटर्स ने शिक्षा सत्र 2020-21 की पाठ्यपुस्तक मुद्रण निविदा में भाग लिया था। टेंडर में उनका रेट पास होने के बाद पाठ्यपुस्तक ने किताबों की छपाई के लिए उनसे अनुबंध किया। इन फर्मों ने न तो निर्धारित समय-सीमा में किताबें छापकर दी और न ही छपाई की क्वालिटी अच्छी थी। इतना ही नहीं इन फर्मों ने अधूरा काम निगम को वापस कर दिया। इससे निगम को ऐन मौके पर किताबों की छपाई का काम दूसरी फर्म को सौंपना पड़ा। इससे निगम का कार्य प्रभावित हुआ। मुद्रण निविदा में उल्लेखित शर्तों के अनुरूप इन्हें तीन साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया है।

किताबों में इस बार 250 जीएसएम का होगा कवर पेज
सीजी बोर्ड की किताबों में इस बार कवर पेज थोड़ा अलग होगा। इस बार 250 जीएसएम के पेपर से कवर पेज तैयार किया जा रहा है। अब तक किताबों के कवर पेज 220 जीएसएम के पेपर से तैयार किए जाते थे। अब जीएसएम बढ़ाने से कवर पेज अच्छा होगा। इससे किताबें ज्यादा सुरक्षित रहेंगी।



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फाइल फोटो।


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