देश के कुछ राज्यों में बर्ड फ्लू के प्रकोप से पक्षियों की मौत के बाद देशभर में एडवाइजरी जारी कर दी गई है। दंतेवाड़ा में भी पशुधन विकास विभाग के डॉक्टर व कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अलर्ट हो गए हैं। यहां कड़कनाथ का उत्पादन, पालन सबसे ज़्यादा है। अभी 250 से ज़्यादा समूह व व्यक्ति कड़कनाथ व देसी चूजों का पालन कर रहे हैं।
इनके पास अभी 50000 से ज़्यादा सिर्फ कड़कनाथ के चूजे पल रहे हैं। जो सम्भाग ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में सबसे ज़्यादा हैं। सप्लाई भी दूसरे प्रदेशों में हो रही है। इसके अलावा बटेर, देसी मुर्गियों का भी पालन यहां अच्छी खासी मात्रा में हो रहा है। ऐसे में देश के अलग- अलग हिस्सों में फैली इस बीमारी का दंतेवाड़ा में भी हड़कम्प मचा हुआ है।
विशेषज्ञों ने बताया कि फ्लू का वायरस पक्षियों के थूक, स्वैब और मल में होता है। इसका वायरस इंसानी शरीर में आंखों, नाक या मुंह के ज़रिए जा सकता है।
अभी इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ज़रूरी
- जितना सम्भव हो सके पोल्ट्री फॉर्म के पास जाने से बचें।
- उन राज्यों में जाने से बचें जहां बर्ड फ्लू फैला हुआ है।
- बाहर से पका हुआ पोल्ट्री उत्पाद खाने से बचें।
- साफ- सफाई का पूरा ध्यान रखें।
फील्ड अफसरों की मीटिंग लेकर सतर्क रहने कहा
डिप्टी डायरेक्टर अजमेर सिह ने कहा कि दंतेवाड़ा के जितने भी पोल्ट्री फॉर्म हैं वहां सतर्क रहने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। फील्ड अफसरों की मीटिंग लेकर भी उन्हें इससे जुड़ी ज़रूरी बातें बताई जा रही हैं व लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी जाएगी।
बर्ड फ्लू से बचने हर संभव कोशिश कर रहे
कृषि वैज्ञानिक डॉ नारयण साहू ने कहा कि दंतेवाड़ा में कड़कनाथ मुर्गा का उत्पादन सबसे ज़्यादा है। यहां पोल्ट्री फॉर्म की संख्या भी अधिक है। व जितने भी पोल्ट्री फॉर्म की मॉनिटरिंग की जा रही है वहां बर्ड फ्लू से बचने हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
इन्हें खतरा ज्यादा
- पोल्ट्री फॉर्म उत्पाद का व्यवसाय करने वालों।
- किसानों।
- अधपका मुर्गा , अंडा खाने वालों।
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