नारायणपुर जिले में आमदाई खदान के लीज को निरस्त करने और फोर्स की तैनाती को हाटने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब वृहद रूप लेने लगा है। मंगलवार को इलाके के हजारों आदिवासी आमदई घाटी के नीचे जमा हो गए और इन्होंने घोषणा की है कि विरोध स्वरूप सभी खदान के पहाड़ पर चढ़ेंगे और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती है वहीं डेरा जमाकर रखेंगे। आदिवासियों के इस आंदोलन में शामिल होने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी भी मौके पर पहुंची हुई हैं। वहीं रुकेंगी।
सोनी सोढ़ी ने बताया कि इलाके के लोग लगातार खदान की लीज को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इलाके में जवानों की तैनाती का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि खदान को लेकर स्थानीय लोगों की मर्जी के खिलाफ काम किया जा रहा है। सोनी ने बताया कि विरोध में लोग मंगलवार को ही पहाड़ पर चढ़ने वाले थे लेकिन शाम हो जाने और अंधेरा होने की वजह से पहाड़ पर नहीं चढ़ा जा सका। ऐसे में अब बुधवार की सुबह पहाड़ पर चढ़ाई की जाएगी।
लीज पर दी गई जमीन हमारा देवस्थान
इधर आदिवासियों का कहना है कि सरकार ने आमदई घाटी में जिस खदान को निक्को कंपनी को दिया है वह खदान की जमीन आदिवासियों की है और वह आदिवासियों के देवी-देवताओं का स्थान है। आदिवासियों का कहना है कि देवस्थान के अलावा इस खदान के शुरू होने से पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचेगा इसलिए खदान की लीज को निरस्त किया जाना चाहिए।
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