हाईकोर्ट ने एक जमानत के मामले में सुनवाई करते हुए अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि कोई भी दांडिक न्यायालयों को प्रथम दृष्टया सीधे गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं करना चाहिए। साथ ही विवेचना अधिकारी को आरोप पत्र प्रस्तुत करने के संबंध में आरोपी को सूचित करना चाहिए। खासकर तब जब आरोपी जमानत पर हो।
कोर्ट का यह फैसला अब आने वाले समय में जमानत के मामलों में न्याय दृष्टांत होगा। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। तखतपुर के दानेश्वर देवांगन उर्फ लाला की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में बताया गया कि तखतपुर की एक महिला डॉक्टर के पति जो कि पेशे से डॉक्टर हैं जिम गए थे।
वहां से उनका मोबाइल गुम हो गया। मोबाइल को एक याचिकाकर्ता पाया था। मोबाइल से महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें वह वायरल कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर दंपत्ति, याचिकाकर्ता और उसके दोस्त के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया। साथ ही चारों आरोपियों को थाने से ही मुचलके पर छोड़ दिया गया।
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