जिले के अंदरुनी गांवों में नक्सल आतंक के चलते सड़क पुल पुलिया नहीं बन पा रहे थे। फोर्स की तैनाती के बाद आतंक कमजोर पड़ा तो सरकार ने उन गांवों तक विकास पहुंचाने सड़क तथा पुल-पुलिया काम कराने शुरू किए। अभी भी समस्या ये है कि इन अंदरूनी गांवों में निर्माण कार्यों की सही माॉनीटरिंग नहीं हो पाती। बड़े झाड़कट्टा-मेंड्रा मार्ग में तो ठेकेदार ने सड़क बनाने में उपयोग होने वाले 40 तथा 60 एमएम बोल्डर से 6 पुलियों का निर्माण करा दिया जबकि इन पुलियों के निर्माण में 20 एमएम गिट्टी का उपयोग करना होता है।
सालों बाद नक्सल क्षेत्रों में सड़क तथा पुल पुलियों का काम शुरू हुआ तो ग्रामीणों में उत्साह था लेकिन ठेकेदारों द्वारा घटिया निर्माण कराया जा रहा है जिससेर ग्रामीणों में नाराजगी भी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बड़े झाड़कट्टा से रामपुर सड़क निर्माण कार्य ग्लोबल कंट्रक्शन कंपनी कोरबा को मिला है जिसने काम पेटी में एक स्थानीय ठेकेदार दिलीप मंडल को दिया है। इस पेटी ठेकेदार ने मार्ग में 6 पुलियों का निर्माण सड़क बनाने के लिए उपयोग में आने वाले बोल्डर 40 और 60 एमएम का उपयोग करते ढलाई करा दी। यही नहीं जमीन खोदकर बगैर बेस कांक्रीट किए ढांचा खड़ा कर दिया गया है। ठेकेदार द्वारा कराए जा रहे घटिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने विरोध किया लेकिन ठेकेदार किसी की नहीं सुन रहा है।
रपटे पर पुराना पाइप रख कर दी गई ढलाई : मदले से मेंड्रा तक वन विभाग की पुरानी सड़क थी जिस पर वन विभाग ने पिछले वर्ष बन रही पुलियों पर रपटा निर्माण कराया था। वर्तमान में ठेकेदार द्वारा पुराने रपटे पर पाइप रखकर ढलाई कर दी गई है जो जांच का विषय है। पाइप पुलिया निर्माण में ठेकेदार द्वारा दूसरी जगह उपयोग हो चुके पुराने व खराब पाइप को लाकर अंदरुनी इलाके की सड़क में बन रही पुलिया में लगाया जा रहा है। ठेकेदार द्वारा घटिया काम किया जा रहा है लेकिन विभाग के अफसर इसे लेकर मौन है।
जांच में गड़बड़ी पाई तो होगी कार्रवाई
अधीक्षण यंत्री प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना कांकेर मुकेश कुमार संतोषी ने कहा कि अगर इस तरह का घटिया कार्य हो रहा है तो कार्यपालन अभियंता और सब इंजीनियर से जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। जांच में गड़बड़ी पाई गई तो ठेकेदार तथा संबंधित अफसर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सड़क निर्माण के बारे में
कार्य: बड़े झाड़कट्टा से रामपुर
- 10 किमी लंबाई
- 3 मीटर चौड़ाई
- 5 करोड़ लागत
नहीं की जाती है मॉनीटरिंग
नक्सल प्रभावित इलाके में निर्माण कार्य में ठेकेदारों द्वारा जमकर मनमानी की जाती है। कारण इन क्षेत्रों में विभाग के अफसर मॉनीटरिंग करने नहीं पहुंचते। यही नहीं यहां के भोले भाले ग्रामीणों को यह तक नहीं पता होता शिकायत कहां करना है। कभी शिकायत हो भी गई तो कोई जांच करने कोई नहीं पहुंचता। इन सब का फायदा उठा ठेकेदार भ्रष्टाचार करते हैं।
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