राजधानी रायपुर समेत जिले के लोगों को अब जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए किसी भी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं होगी। दोनों प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। अब तक इन प्रमाणपत्रों के लिए नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ते थे। जन्म प्रमाणपत्र आवेदन के बाद प्रशासन की प्रक्रिया पूरी करके अस्पताल से जारी हो जाएंगे। मृत्यु प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन आवेदन के बाद जारी होंगे। दोनों ही मामलों में मोबाइल पर सूचना आ जाएगी कि प्रमाणपत्र कहां से कलेक्ट करने हैं। कलेक्टर ने दोनों ही प्रमाणपत्रों को निशुल्क कर दिया है। अब तक इसके आवेदन पर 5 रुपए का शुल्क लगता था और इसके ऊपर भी पैसे खर्च हो रहे थे। इसे निशुल्क करने के साथ-साथ ऑनलाइन की जो प्रक्रिया अपनाई गई है, उससे लोगों को ऊपरी तौर पर भी खर्च नहीं करना होगा।
अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रमाण पत्र बनाने के लिए केंद्रीय सॉफ्टवेयर का उपयोग होगा। इसलिए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए दफ्तरों में आवेदन करने के बजाय सीधे ऑनलाइन आवेदन किए जाएंगे। आवेदन सबमिट होने और बनने के बाद आवेदन करने वालों को इसका एसएमएस भी आएगा। कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) डाॅ. एस. भारतीदासन ने जिले के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के रजिस्ट्रारों की बैठक लेकर दो टूक कहा कि जिले के सभी रजिस्ट्रार अपने क्षेत्र में होने वाले जन्म-मृत्यु की का पंजीकरण कर उसका प्रमाण पत्र बनाने के बाद हर महीने की 5 तारीख को उसकी रिपोर्ट भी देंगे। इस रिपोर्ट में बताना होगा कि उनके क्षेत्र में कितने प्रमाण पत्र लंबित हैं और वे क्यों नहीं बने हैं। उचित कारण नहीं बताने पर ऐसे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। ऐसे अफसरों के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ ही उनकी सैलरी से रकम काटी जाएगी।
कहीं भी 100 फीसदी पंजीयन नहीं
जिले में सौ फीसदी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीयन के लिए अंतरविभागीय समन्वय समिति बनाई गई है। बैठक में समिति के अफसरों ने रिपोर्ट दी कि 2020 में जिले के 92.9 प्रतिशत संस्थाओं, 88.9 ग्रामीण क्षेत्र तथा 94.9 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में जन्म-मृत्यु का पंजीयन किया गया है। यानी कहीं भी 100 फीसदी टारगेट पूरा नहीं किया गया। इस पर कलेक्टर नाराज भी हुए। उन्होंने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण काम है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में होने वाले मृत्यु प्रकरणों में मौत का चिकित्सीय प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य किया है।
सरकारी अस्पतालों में सबसे खराब व्यवस्था
जन्म और मृत्यु प्रमाण बनवाने के मामले में निजी अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था है। वहां जन्म के साथ ही आवेदन देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने लोगों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है। अंबेडकर अस्पताल में प्रमाणपत्र देने के लिए दो से चार हफ्ते तक का समय लगा दिया जाता है। कई बार तो जानकारी नहीं होने के अभाव में महीनों प्रमाणपत्र नहीं दिए जाते हैं। इसी तरह का हाल दूसरे सरकारी अस्पतालों में भी है। इसी अव्यवस्था को दूर करने के लिए कलेक्टर ने अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि तय समय में ही सभी लोगों को प्रमाणपत्र मिलने चाहिए। अब किसी भी सरकारी अस्पताल में प्रमाणपत्र लंबित हुए तो अफसरों पर ही कार्रवाई होगी।
डिजिटल सिग्नेचर को लेकर ज्यादा विवाद
दूसरी ओर च्वाइस सेंटर, ग्राम पंचायत, अस्पताल आदि संस्थाओं का कहना है कि जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में अफसरों को डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं। खासतौर पर निगम के अफसर इस काम को करने में कोताही बरतते हैं। लगातार प्रमाणपत्र जारी नहीं होने की वजह से ऑनलाइन पेंडिंग आवेदनों की संख्या बढ़ती ही जाती है। इससे आवेदन करने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी होती है। इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के बाद उसमें आंशिक संशोधन के लिए भी लोगों को भटकना पड़ता है। अब ऐसे लोगों को दफ्तरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। प्रमाण-पत्र में संशोधन भी ऑनलाइन ही किया जाएगा।
प्रमाण पत्र बेहद जरूरी, इसलिए अनिवार्य रूप से बनाएं
नियमों के अनुसार जन्म प्रमाण पत्र बच्चे का पहला वैधानिक अधिकार और पहचान है। यह कई तरह के कामों में बेहद जरूरी प्रमाण पत्र होता है। जन्म तिथि, जन्म स्थान का प्रामाणिक दस्तावेज, पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार के निराकरण के लिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र अनिवार्य है। कोर्ट में चलने वाले मामलों में भी यह सबूत का काम करता है। इसी तरह स्कूलों में दाखिला, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटरआईडी, पासपोर्ट, बीमा संबंधी मामलों में मुआवजा लेने या किसी राशि में क्लेम करने के लिए भी इन प्रमाण पत्रों का उपयोग होता है। सरकारी योजनाओं के लिए भी प्रमाण पत्र जरूरी है। ऐसे में जिले में हर जगह पर इसका पंजीयन 100 फीसदी होना ही चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के भुगतान के लिए भी मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी है। इसलिए एक सप्ताह के भीतर ही पंजीकरण कर मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया जाए।
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