राजधानी में कोरोना के टीकाकरण की जिम्मेदारी मोटे तौर पर महिलाओं के हाथों में होगी और यह छत्तीसगढ़ का अकेला जिला है, जहां ऐसा होने जा रहा है। दरअसल रायपुर में कोरोना टीकाकरण के जिला नोडल अधिकारी और सीएमएचओ, दोनों ही महिलाएं हैं। यही नहीं, रायपुर के 46 वैक्सीनेशन बूथ में टीका लगाने का काम 250 महिला हेल्थवर्कर के जिम्मे होगा। ट्रायल रन में भी महिलाएं ही आगे थीं। रायपुर में टीकाकरण के ड्राय-रन में जिन हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर ने भाग लिया, उनमें 96 फीसदी महिलाएं ही थीं।
प्रदेश में बड़ी आबादी वाले जिलों में रायपुर में आबादी के टीकाकरण के लिए एक बड़ी कार्ययोजना भी बनाई जा रही है। रायपुर जिले में 2011 की जनसंख्या के मुताबिक आबादी का घनत्व 310 व्यक्ति प्रति किमी है। राजधानी के घने इलाके में 15 लाख लोगों का निवास है, और आउटर में 3-4 लाख। हालांकि जिले के कुल आउटर इलाके में 11 लाख से ज्यादा लोग हैं। पहले चरण में टीकाकरण के लिए 46 बूथ हैं। माना जा रहा है कि आम लोगों को टीका लगना शुरू होगा तो इससे 20 गुना बूथ की जरूरत पड़ेगी। पूरी आबादी को टीके लगाने के वक्त हेल्थ वर्कर और वेक्सीनेटर के और भी ज्यादा स्टॉफ की जरूरत भी होगी। इसके लिए ट्रेनिंग की तैयारियां भी की जा रही है।
शहर के लिए 1 लाख टीके इसी फ्रिजर में स्टोर
रायपुर शहर के वैक्सीन रखने के लिए आयुर्वेदिक कॉलेज के पीछे जिला वैक्सीन स्टोर में एक लाख टीके रखने की क्षमता वाला डीप फ्रिजर इंस्टाल कर दिया गया है। जिले को 99 लीटर क्षमता वाले पांच डीप फ्रिजर मिले हैं। राजधानी में टीके यहीं से सप्लाई किए जाएंगे। इस काम में तीन दर्जन वाहन लगेंगे। सीएमएचओ मीरा बघेल के मुताबिक निर्धारित किए गए 46 वैक्सीन बूथ तक टीके पहुंचाने के पूरे सिस्टम पर जिला कार्यालय में कंट्रोल रूम के जरिए मॉनिटरिंग की जाएगी।
इतना बड़ा टीकाकरण 1995 में हुआ था
प्रदेश में अविभाज्य मध्यप्रदेश के दौर में 1995 दिसंबर में पहली बार पोलियो वैक्सीनेशन का बड़ा अभियान शुरू हुआ था। पहले अभियान में काम कर चुके ज्यादातर अधिकारी अब कोरोना वैक्सीनेशन की कमान संभाल रही कोर टीम का हिस्सा है।
केयर सेंटर में ईसीजी मशीन
कोविड केयर सेंटर में कोरोना मरीजों के दिल की सेहत का ख्याल रखने के लिए ईसीजी मशीनें भी रखी जाएंगी। दरअसल, ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मौसम में बदलाव के चलते कार्डियक अरेस्ट के मामले बहुत ज्यादा आ रहे हैं। खासतौर पर ऐसे मरीज जो कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। उनमें भी इस तरह की शिकायतें बढ़ रही है। डॉ. अंबेडकर अस्पताल के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. स्मित श्रीवास्तव के मुताबिक कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों को दिल की सेहत का बहुत ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है। कोरोना के इलाज के दौरान अक्सर ठीक हुए मरीजों में खून गाढ़ा हो जाने की स्थिति देखी जाती है। गाढ़ा खून फेफड़े की नसों को ब्लॉक कर देता है। इससे मौत तक हो जाती है। कोरोना के ठीक होने के बाद लोगों को बहुत ज्यादा पानी पीना चाहिए। विटामिन सी के सेवन के साथ शारीरिक व्यायाम चहल कदमी चलते रहना चाहिए। कोविड केयर सेंटरों में ईसीजी मशीनों के साथ दिल की दिक्कत की शिकायत करने वाले मरीजों के खून की जांच पर भी फोकस करना चाहिए।
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