जिले के 16 में से 15 कॉलेज में प्राचार्य नहीं है। इनकी कुर्सियां वर्तमान में प्रभारी प्राचार्य संभाल रहे हैं। पीजी कॉलेजों में मंजूर प्रोफेसर के सभी पद भी खाली है। जिले के टीसीएल लीड कॉलेज से लेकर अधिकांश जगहों पर असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभाग प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार पर रखा है। स्वीकृत पदों की तुलना में असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या भी कम है, इसलिए अतिरिक्त प्रभार देने से शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कोविड-19से कॉलेज में कामकाज का लोड प्रोफेसरों पर कम रहा, पर शैक्षणिक 2021-22 में चुनौतियां कम नहीं होने वाली है, क्योंकि कॉलेजों में मंजूर पदों की तुलना में काम करने वाले प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, क्लर्क समेत अन्य सभी पद 45% तक खाली है।
16 प्राचार्य, 25 से ज्यादा प्रोफेसर और 48 से ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद रिक्त है। सबसे ज्यादा पद कॉलेजों में रिक्त है। 2018 में शुरू हुए बिर्रा व नगरदा कॉलेज 10-10 मंजूर पदों की तुलना में 3 और 2 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की है।
जानिए... तीन महत्वपूर्ण कॉलेजों में आधे से ज्यादा पद खाली
टीसीएल कॉलेज में प्राचार्य समेत 15 पद हैं खाली टीसीएल कॉलेज में 44 पद मंजूर है, इनमें सिर्फ 29 पदों पर नियुक्ति की गई है। शेष 17 पद खाली हैं। यह जिले का लीड कॉलेज है, इसके बावजूद यहां सात प्रोफेसरों के महत्वपूर्ण पदों में किसी एक भी नियुक्ति अब तक नहीं की है। प्राचार्य का पद भी रिक्त है, इसकी जिम्मेदारी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एपी वर्मा को दी गई है।
डभरा कॉलेज के 35 पदों में 22 को नहीं भरे: डभरा कॉलेज में कुल मंजूर 35 पदों में से 22 रिक्त है। इसमें प्राचार्य, एक प्रोफेसर, 10 असिस्टेंट प्रोफेसर, खेल अधिकारी, लाइब्रेरियन, बुक लिफ्टर समेत सभी जरूरी पद रिक्त है। कॉलेज में साइंस के महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रोफेसर नहीं है। प्रोफेसर नहीं होने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका असर पड़ रहा है।
अकलतरा कॉलेज 5 प्रोफेसर समेत 17 पद रिक्त- अकलतरा के डॉ इंद्रजीत कॉलेज में प्राचार्य समेत कुल 39 स्वीकृत पदों में 17 रिक्त है। यहां अर्थशास्त्र, बॉटनी, जुलॉजी, समेत 5 प्रमुख विषयों पर प्रोफेसरों के पद अबतक नहीं भरे गए हैं। 13 असिस्टेंट प्रोफेसरों की तुलना में सिर्फ 10 ही काम कर हरे हैं। इनमें से एक असिस्टेंट प्रोफेसर को प्राचार्य का प्रभार दिया गया है।
ये हैं जिले के 15 गर्वमेंट कॉलेज जहां प्राचार्य है ही नहीं
टीसीएल कॉलेज जांजगीर, जाज्वल्यदेव नवीन कन्या कॉलेज जांजगीर, इंद्रजीत कॉलेज अकलतरा, लक्ष्मणेश्वर कॉलेज खरौद, गर्वमेंट कॉलेज डभरा, वेदराम कॉलेज मालखरौदा, कांति कुमार भारतीय कॉलेज सक्ती, नवीन कॉलेज जैजैपुर, नवीन कॉलेज बलौदा, गर्वमेंट कॉलेज हसौद, गर्वमेंट कॉलेज नवागढ़, नवीन कॉलेज पामगढ़, नवीन कॉलेज चंद्रपुर, नवीन कॉलेज बिर्रा, नवीन कॉलेज नगरदा।
लाइब्रेरियन और बुक लिफ्टर तक कॉलेजों में नहीं
सक्ती, चांपा, अकलतरा, डभरा,पामगढ़, जैजैपुर समेत करीब 8 कॉलेजों में लाइब्रेरियन और बुक लिफ्टर के अधिकांश पद खाली है, वहीं सहायक ग्रेड- दो और तीन के पद भी रिक्त हैं। इनकी जगह कुछ कॉलेज संविदा नियुक्ति के भरोसे काम चला रहे हैं। कुछ ने इन रिक्त पदों के लिए शासन से कर्मचारियों की मांग की है।
असिस्टेंट प्रोफेसरों के भरोसे काम
कॉलेजों में स्वीकृत पदों की तुलना में पदस्थ कर्मचारियों की संख्या कम है। जिले में एक मात्र चांपा को छोड़कर सभी जगह असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभार संभाल रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या भी कम है, ऐसे में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य तय समय पर कर पाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।’’ डॉ एपी वर्मा, प्रभारी प्राचार्य लीड कॉलेज जांजगीर
कॉलेजों में प्रोफेसरों की नियुक्ति जरूरी
पीजी कॉलेजों में अनिवार्य रूप से प्रोफेसरों की नियुक्ति होनी चाहिए, क्योंकि प्रोफेसरों के लिए जो मापदंड है, उसके अनुरूप वह संबंधित विषय का ज्ञान रखता है। पीजी के स्टूडेंट निश्चित रूप से चाहता है, कि उसे संबंधित विषय का प्रमाणिक ज्ञान मिले, लेकिन अधिकांश कॉलेजाें में ऐसा नहीं है, जिससे स्टूडेंट्स वंचित हो रहे हैं। यदि सरकार चाहे तो पात्रता रखने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों को पदोन्नतकर समस्या समाप्त कर सकती है, पर उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसरों की भी नियुक्ति करनी होगी।''
अंबिका वर्मा, रिटायर्ड प्राचार्य उच्च शिक्षा विभाग
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