बिना जांच किए ही काेराेना की निगेटिव रिपाेर्ट देने के मामले में जिला आपदा प्रबंध प्राधिकार के अध्यक्ष सह डीसी उमा शंकर सिंह ने पैथकाइंड लैब काे शाे-काॅज कर 24 घंटे के अंदर लिखित स्पष्टीकरण का जवाब देने का आदेश दिया है। स्पष्टीकरण का जवाब संताेषजनक नहीं पाए जाने पर आपदा प्रबंध अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पैथकाइंड लैब पर आराेप है कि वह जिले में काेराेना संक्रमण की निगेटिव देने का रैकट चला रहा था। इसके बदले में लैबकर्मी संबंधित लाेगाें को निगेटिव रिपोर्ट देने के लिए 400 रुपए ले रहे थे।
इस बाबत शिकायत मिलने पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष सह डीसी ने अपर समाहर्ता श्याम नारायण राम के नेतृत्व में 5 सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। जांच टीम ने पूरे मामले की जांच के बाद रिपाेर्ट डीसी काे साैंपी, जिसमें बताया गया कि पैथकाइंड का कर्मी विकास और वीएलई गाैतम कुमार पूरे रैकट का संचालन कर रहा था। डीसी ने उन दाेनाें के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई का आदेश दिया है।
ऐसे पकड़ में आया मामला.. आरएटी किट खत्म, फिर भी उसके नाम पर कर रहा था कोरोना जांच
आईडीएसपी के डीएसओ डाॅ राज कुमार सिंह का कहना है कि सीएमएस पाेर्टल पर काेराेना संक्रमण काे लेकर जिलेभर की जांच रिपाेर्ट प्रत्येक दिन दर्ज की जाती है। जांच के क्रम में पता चला कि पैथकाइंड लैब के सिंदरी ब्रांच से हर दिन 100-150 रिपाेर्ट दर्ज की जा रही है। इसका फ्रेंचाइजी विकास नाम व्यक्ति ने लिया है, जाे विभिन्न ब्लाॅक में वीएलई के माध्यम से आरएटी किट के नाम पर काेराेना की निगेटिव रिपाेर्ट देने का का धंधा चला रहा था।
वह भी तब, जब पूरे जिले में आरएटी किट की सप्लाई बंद कर दी गई है। इसके बाद भी आरएटी किट से एसआरएफ जेनरेट कर फर्जी तरीके से सीएमएस में इंट्री की जा रही थी। संदेह हाेने पर डीसी से शिकायत की, इसके बाद जांच में सारा मामला सामने आया।
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