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रेलवे ने कर्मचारियों के इलाज के दौरान रेफरल सिस्टम में बदलाव किया है। अब रेलकर्मियों को गंभीर स्थिति में किसी निजी अस्पताल में रेफर नहीं किया जाएगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में इलाज होगा। रेलवे बोर्ड ने यह आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद रेल कर्मचारियों में काफी नाराजगी है। रेल कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था ठीक नहीं है। बताया जा रहा है कि रेलवे कर्मचारियों की चिकित्सा में हो रहे खर्च को बचाने के लिए रेफरल सिस्टम को बदला गया है।

चक्रधरपुर मंडल मेंस कांग्रेस के संयोजक शशि मिश्रा ने कहा रेलवे को कर्मचारी हित में रेफरल सिस्टम के नए आदेश को वापस लेना होगा। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे ने बोर्ड में इसके खिलाफ पत्र दिया है। वहीं, चक्रधरपुर मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से मिलकर मेंस कांग्रेस ने विरोध जताया है। वहीं सुविधा में कटौती पर निराशा व्यक्त किया है।

टाटा मोटर्स या ब्रह्मानंद में होता था रेलकर्मियों का इलाज

टाटानगर या चक्रधरपुर मंडल अस्पताल से रेलकर्मियों को अभी टाटा मोटर्स अस्पताल या ब्रह्मानंद में रेफर किया जाता था। यूनियन व एसोसिएशन नेताओं ने कहा कि इलाज के लिए रेफरल की पुरानी व्यवस्था ठीक थी। हाल के बदलाव का संगठन विरोध कर रहा है।
-शशि मिश्रा, मंडल संयोजक, रेलवे मेंस कांग्रेस।



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