झारखंड अलग राज्य के आंदोलकारियों को जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है। राज्य सरकार झारखंड-वनांचल व जेपी आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का पुनर्गठन करने की तैयारी कर रही है। ज्ञात हो कि 9 फरवरी को इस आयोग का कार्यकाल समाप्त हो गया था।
इस वजह से करीब 40 हजार लोगों के लंबित आवेदनों पर निर्णय नहीं लिया जा सका है। झारखंड आंदोलनकारी माेर्चा लगातार मुख्यमंत्री हेमंत साेरेन का ध्यान इस पर आकृष्ट कराया जाता रहा है।
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, झारखंड के अधीन झारखण्ड-वनांचल व जेपी आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का गठन वर्ष 2012 में राज्य सरकार ने किया था। आयोग द्वारा वर्ष 2012 से वर्ष-2020 फरवरी तक लगभग 5,000 झारखंड आंदोलनकारियों को चिन्हित किया है। इससे संबंधित सरकार द्वारा आदेश भी जारी किया जा चुका है।
वर्ष-2015 में इस आयोग को ही जय प्रकाश नारायण आन्दोलन (वर्ष-1974 से 1977 तक) के आंदोलनकारियों को भी नियमानुसार चिन्हित करने का जिम्मा राज्य सरकार द्वारा दिया गया । उसके बाद आयोग में जय प्रकाश नारायण आन्दोलन से संबंधित लगभग 1300 आवेदन आयोग को विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हुआ। जिसमे लगभग 230 जय प्रकाश नारायण आंदोलनकारियों को चिन्हित किया गया ।
आयोग के गठन के बाद कई बार राज्य सरकार द्वारा आयोग का अवधी विस्तार या पुनर्गठन किया गया । आयोग का कार्यकाल 09.02.2020 को समाप्त होने के बाद से इसका काम ठप हो गया है। वह भी तब जबकि अब भी 40 हजार के आसपास आवेदन लंबित हैं। जय प्रकाश नारायण आंदोलन से संबंधित लंबित आवेदनों की संख्या भी करीब 1100 है।
झारखंड आंदोलनकारियों को अलग -अलग श्रेणियों में बांटकर उन्हें पेंशन , सम्मान राशि और सम्मान पत्र देने की नियमावली बनी हुई है। जिन लोगों के नामों की अधिसूचना हो चुकी है। वैसे लोगों को सम्मान राशि मिलनी शुरू हो चुकी है। इस आयोग के सदस्य तो बदलते रहे हैं लेकिन आयोग में लंबे समय तक रिटायर जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद ही इसके अध्यक्ष रहे हैं।
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