जिला उपभाेक्ता फाेरम में पिछले दाे वर्षों से फरियादियाें काे सिर्फ तारीख-दर-तारीख मिल रही है। वजह यह कि फोरम में कोई है ही नहीं, जो केसों की सुनवाई कर सके। यहां अध्यक्ष के साथ-साथ एक-एक पुरुष और मजिला सदस्य के पद हैं, लेकिन ये तीनों पद खाली हैं। फोरम के पिछले अध्यक्ष नित्यानंद सिंह थे, जिनका कार्यकाल 29 अक्टूबर 2018 काे समाप्त हाे गया। महिला सदस्य पुष्पा सिंह का वर्ष 2018 में और पुरुष सदस्य का अप्रैल 2020 काे कार्यकाल समाप्त हाे चुका है। इन पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है। अध्यक्ष के पद पर रिटायर्ड जज को ही नियुक्त किया जाता है।
दिवंगत राजकिशोर महतो ने विधायक रहते हुए विधानसभा में शून्यकाल में यह मामला उठाया था, लेकिन उसके सालभर से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नियुक्तियां नहीं हुईं। अब स्थिति यह है कि फरियादी फाेरम के कार्यालय आते हैं, सुनवाई नहीं होने की जानकारी मिलने पर वहां माैजूद कर्मियाें से उनकी नोक-झोंक होती है। फिर निराश होकर अगली तारीख लेकर चले जाते हैं। आए दिन होनेवाली नोक-झोंक से फोरम के कर्मी भी परेशान हैं। गौरतलब है कि धनबाद में उपभोक्ता फाेरम में 405 मामले लंबित हैं। इनमें 250 कंप्लेंट केस और 155 इंक्यूशन एप्लिकेशन (ईए) शामिल हैं। कंप्लेंट केस असल में नए केस हैं, जबकि ईए वे मामले हैं, जिनमें फाेरम के फैसले के बाद भी उनका पालन न किया गया हो।
रोजाना खुलता है फोरम का कार्यालय, जिला पंचायती राज पदाधिकारी हैं प्रभार में, कर्मियों के साथ निबटाते हैं फाइलें
ऐसा भी नहीं कि फोरम बंद हो। इसका कार्यालय नियमित रूप से खुलता है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी सुनील कुमार इसके प्रभार में हैं। बड़ा बाबू, बेंच कलर्क, डीएमए और दाे अनुसेवक रोजाना कार्यालय आते हैं। बस, किसी केस की सुनवाई नहीं होती है। ये लोग कार्यालय के औपचारिक काम निबटाते हैं। केसों में संबंधित पक्षों को अगली तारीख दे दी जाती है।
1 कराेड़ तक के दावों को निबटाने, 7 साल तक की सजा देने का अधिकार, पर मीडिएशन सेंटर नहीं बना
उपभाेक्ता फाेरम काे हाल ही में केंद्र सरकार ने कई शक्तियां सौंपी हैं। पहले फोरम को 50 लाख रुपए तक के दावे का निबटारा करने का अधिकार था, लेकिन वह किसी को सजा नहीं सुना सकता था। अब केंद्र सरकार ने जिला उपभाेक्ता फाेरम काे एक कराेड़ रुपए तक के दावों के निबटाने और किसी के दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा देने का अधिकार भी दे दिया है। साथ ही, शिकायत के बाद काउंसलिंग करने का भी अधिकार दिया गया है। काउंसलिंग में मामले का निबटारा नहीं होने पर फाेरम में सुनवाई होती है।
सरकार की ओर से जिला उपभाेक्ता फाेरम में मिडिएयन सेंटर के लिए जगह चिह्नित करने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए धनबाद में फोरम के भवन के ऊपर कमरा बनना था। प्रस्ताव भवन प्रमंडल काे भी भेजा गया था, लेकिन फाेरम के भवन का नींव कमजाेर हाेने का हवाला देते हुए मीडिएशन सेंटर के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
- 405 मामले लंबित हैं फोरम में
- 250 कंप्लेंट केस लंबित हैं
- 155 ईए सुनवाई के इंतजार में
पद खाली रहने से फोरम का उद्देश्य ही बेमानी हो गया है
उपभोक्ता संरक्षण कानून... नाम से ही इसका मकसद स्पष्ट है। अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस और सेवा में कमी के मामलों में उपभोक्ताओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए उपभोक्ता फोरम की स्थापना की गई। लेकिन, धनबाद में फोरम के अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली होने से इसका उद्देश्य ही बेमानी हो गया है। धनबाद के उपभोक्ता दो साल से अनुचित तरीके से कारोबार करनेवाले व्यापारियों की मनमानी और सेवा-सुविधा में कमी झेलने को मजबूर हैं।
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