न्यूनतम किराया 10 रुपए सहित अन्य मांगाें के समर्थन में जिले के 15 हजार ऑटाे चालक साेमवार देर रात से हड़ताल पर चले गए है। ऑटो हड़ताल के कारण मंगलवार सुबह से ही शहर की रफ्तार थम गई। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हुई, जो ट्रेन या बस से धनबाद पहुंचे। धनबाद पहुंचने के बाद उन्हें आगे का सफर के लिए ऑटो नहीं मिला। वहीं, ऑटाे चालक श्रमिक चाैक के पास एकत्र हुए और अपनी मांगाें के समर्थन में नारेबाजी की। चालकाें ने कहा कि किसानाें की तरह वे भी अपनी मांगाें के समर्थन में आंदाेलन करने काे विवश हैं।
लाॅकडाउन के दाैरान तीन माह घर पर बैठे हैं। दाे साल पहले न्यूनतम किराया छह रुपए लागू हुआ था, लेकिन लाेग 5 रुपए ही देते थे। इतने दिनाें में महंगाई में काफी वृद्धि हुई है। गाड़ी चला कर वे बैंक का किस्त भरें या परिवार का पेट। किराए में हर हाल में बढ़ाेत्तरी हाेनी चाहिए। ऑटो चालकों ने न्यूनतम किराया 10 रुपए और अन्य जगहाें के किराए में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की मांग की। मांगाें के समर्थन में सेवादल चालक संघ, धनबाद जिला ऑटाे महासंघ, झारखंड परिवहन मजदूर यूनियन व टेंपाे चालक माेर्चा आंदाेलन में शामिल है। आंदाेलन के पहले दिन प्रशासन द्वारा हड़ताल खत्म कराने काे लेकर किसी तरह की पहल नहीं की गई।
बसाें में नहीं चढ़ाने दिए सवारी
ऑटाे चालकाें ने बसाें में लाेकल सवारी नहीं चढ़ाने दिया। बसों केे चालकाें को लोकल सवारी नहीं बैठाने की हिदायत दी थी। बस चालकों ने लोकल सवारी नहीं बैठाए।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई
यूनियनाें ने शनिवार काे हड़ताल की घाेषणा की थी। हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने किसी तरह की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी, जिसके कारण लोगों को परेशानी हुई।
हीरापुर का रिक्शा भाड़ा 50
ऑटाे हड़ताल से रिक्शा चालकाें की कमाई हुई। बैंकमाेड़ और हीरापुर जाने के लिए 50 रुपए किराया लिया। आमदिनाें में यह किराया 30 रुपए हाेता था।
शहर की सड़काें पर नहीं लगा जाम
ऑटाे हड़ताल के कारण शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति नहीं बनी। गया पुल के पास भी जाम की स्थिति नहीं बनी। श्रमिक चाैक व नया बाजार ओवरब्रिज खाली दिखा।
इधर, प्रशासन की दो टूक- अभी नहीं बढ़ेगा भाड़ा
एसडीएम सुरेंद्र कुमार का कहना है कि काेराेना महामारी में लाॅकडाउन के कारण आम व खास सभी की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में भाड़ा बढ़ाकर उनके उपर अतिरिक्त बाेझ देना उचित नहीं है। भाड़ा बढ़ाेत्तरी काे लेकर ऑटाे चालाकाें के विभिन्न यूनियन के प्रतिनिधिमंडल मिलने आए थे, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि दाे महीने के बाद ही भाड़ा बढ़ाेत्तरी के संबंध में काेई निर्णय लिया जा सकता है। इसकाे लेकर सभी यूनियनाें काे टास्क दिया गया था कि पहले उसका अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
ऑटाे चालक अपने ड्रेस काेड में आएं। निर्धारित रूट में ऑटाे चलाएं। नियमानुसार ही ऑटाे पर सवारी काे बैठाएं। सभी यूनियन से कहा गया था कि ऑटाे पार्किंग का चयन कर जिला प्रशासन काे सूचित करें। ताकि, उस पर प्रशासन समुचित निर्णय ले सके। ये सभी टास्क पूरा करने के बाद उनसे 14 फरवरी काे बैठक हाेगी, जिसमें नया भाड़ा निर्धारण काे लेकर काेई निर्णय लिया जाएगा। हड़ताल अनुचित है। प्रशासन वार्ता काे लेकर काेई प्रस्ताव नहीं भेजेगा।
सिटी बसों के फेरे बढ़े
ऑटाें चालकाें की हड़ताल को देखते हुए सिटी बसाें ने फेरा बढ़ा दिया है। पहले जहां दिनभर में सिटी बस अपने निर्धारित रूट पर दाे फेरा लगाती थी, वहीं मंगलवार काे सभी रूट पर चलने वाली बसाें ने तीन फेरा लगाई। सिटी बसों से लाेगाें काे थाेड़ी राहत जरूर मिल रही है। फिलहाल नगर निगम क्षेत्र में कुल 13 बसें चल रही है। इसमें महिला समूह की बस भी शामिल है।
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