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Jharkhand daily news

क्रिसमस का समय है। चारों ओर प्रभु यीशु के आगमन को लेकर उत्साह और आस्था का रंग बिखरा है। कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो ही सिर्फ चुप हैं, जबकि इस समय आगमन काल के हर पाक संडे की मिस्सा पूजा उनकी अगुवाई में होती थी। उनकी सक्रियता देख नौजवान भी चकित रह जाते थे। हर वचन मसीह विश्वासियों को राहत पहुंचाते थे। संत मरिया महागिरजाघर की मिस्सा हो या कोई आयोजन। उनके पहुंचते ही चारों तरफ लोगों का बन जाता था।

उनसे आशीष पाने बच्चे, महिला और युवा उतावले रहते थे। क्रिसमस के अभिवादन के लिए लोगों के चेहरे पर अलग ही उमंग दिखती थी। कार्डिनल भी विश्वासियों से अभिवादन के लिए उत्सुक रहते थे। पर आज कार्डिनल एकांत में अपना समय बिता रहे हैं। रह-रह कर उनके चेहरे पर मुस्कुराहट सुबह की तरह खिल उठती है। यह मुस्कान ही उनके मौन को दूर करती है और इसे आशीष समझ उनके चाहने वाले ग्रहण कर लेते हैं।

75 की उम्र में उनका एकांत सेवकों के भरोसे ही बीत रहा

कार्डिनल ने कैथोलिक ईसाइयों के लिए बड़ी धार्मिक जिम्मेदारी निभाई है। झारखंड और आदिवासियों के लिए उनके विचार अहम रहे हैं। उनका जन्म 5 अक्टूबर 1939 में चैनपुर, गुमला में हुआ। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची और रोम के पोंटिफिकल अर्बनानिया विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। 3 मई 1969 को पुरोहित बने। दुमका और जमशेदपुर के आर्चबिशप रहे। मालूम हो कि आर्चबिशप 21 अक्टूबर 2003 को पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें कार्डिनल-प्रीस्ट बनाया। अभी उनका जीवन सेवकों के भरोसे बीत रहा है।



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Smile away the cardinal's loneliness, spending Christmas time in the Toppo Old Age Home surrounded by believers


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