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रावण का वध रोकें- ऐसी फरियादें रोकने अब मानव अधिकार आयोग करेगा सख्ती

रावण को हर साल जलाकर उसके मानव अधिकारों का हनन किया जा रहा है। जबकि उससे बड़ा दुराचारी तो दुर्योधन था। इसलिए रावण वध को रोका जाए। उसके मानव अधिकारों की रक्षा की जाकर उसे न्याय दिया जाए। मानव अधिकार आयोग में आने वाली ऐसी शिकायतों के चलते यह महसूस हो रहा है कि लोगों काे इस संस्था की गंभीरता समझ नहीं आ रही और वे उसके उपयोग को लेकर जागरूक नहीं हैं। वे आयोग और अपना कीमत वक्त और पैसा जाया करते हैं। कई लोग दो लाइन लिखकर अर्जी लगा देते हैं कि उनके मानव अधिकारों का हनन किया जा रहा है। हालांकि वे इसके तथ्य नहीं रखते। अब आयोग इस तरह के मामलों को रोकने लोगों में अवेयरनेस लाने अभियान चलाने जा रहा है। आयोग को कामयाबी के मोर्चे पर मिलेजुले अनुभव मिले हैं। एक तरफ सख्त कानून बनने के बाद भी गांवों में पौनी पसारी व टोनही प्रताड़ना जैसे मामलों पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। इस तरह के प्रकरणों की लगातार शिकायतें आयोग में आती हैं। दूसरी ओर राहत की बात हो सकती है कि पांच सालों में बाल विवाह को लेकर शिकायतें नहीं मिली हैं।

कोरोना की अव्यवस्था पर डॉक्टर पहुंचे आयोग
पिछले दस महीने से प्रदेश कोरोना से जूझ रहा है। कोरोना मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ को जब कोविड सेंटरों व अस्पताल में दुर्व्यवस्था से खुद की जान को खतरा महसूस हुआ और उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वे आयोग पहुंच गए। उन्होंने कहा कि कोविड ड्यूटी करने के बाद उन्हें दो हफ्ते कोरेंटाइन में नहीं भेजा जा रहा है। इसकी जांच अभी आयोग कर रहा है। शासन से जवाब मांगा गया है। इसके अलावा आयोग ने जेल, अस्पतालों, वृद्धाश्रमों आदि का भी निरीक्षण किया है।

कानूनी अड़चनों के चलते कोरबा के गांवों में ही नहीं पहुंची बिजली
एक और दिलचस्प मामला आयोग के समक्ष आया। पता चला कि कोरबा जिसे प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है उसके आसपास के कुछ गांवों में ही अंधेरा है। इन गांवों के लोगों ने बिजली के लिए आयोग में गुहार लगाई। यह पता चलते ही आयोग स्वयं वहां पहुंचा। तब पता चला कि कुछ तकनीकी अड़चनें राज्य व केंद्र सरकार के प्रावधानों को लेकर हैं। आयोग ने जब तक वहां बिजली नहीं पहुंचती, तब तक सोलर सिस्टम से बिजली पहुंचाने की व्यवस्था की।

आयोग 350 प्रकार के प्रकरणों की करता है सुनवाई : नायक
मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष गिरधारी नायक का कहना है कि बेतुकी शिकायतों पर पर आयोग वक्त जाया नहीं करता। क्राइम या प्रताड़ना से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेता है। हम एक कोर्ट की तरह की इसकी जांच करवाते और दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज भी करवाते हैं। यदि वह मामला पुलिस में दर्ज नहीं हुआ है तो। एफआईआर हो जाने के बाद वह पुलिस व कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में चला जाता है। इस साल से आयोग के काम करने का पैटर्न बदल गया है।

इसकी गाइड लाइन राष्ट्रीय मान अधिकार आयोग से मिली है। अब आयोग में 350 तरह के प्रकरणों की सुनवाई करता है। इनकी वर्गीकरण किया गया है। लोगों को आयोग में वे ही केस लाने चाहिए जिससे किसी की मर्यादा, समानता, डिग्निटी, बुनियादी अधिकारों कानून में दिए अधिकारों का हनन हुआ हो। रावण जैसी शिकायतें नहीं। इंप्रेस करने अंग्रेजी में दो लाइन नहीं लिखें। हिंदी में अर्जी दें, लेकिन पुख्ता दस्तावेजों व सटीक शिकायत के साथ, ताकि आयोग न्याय दिला सके।

छत्तीसगढ़ में मानव अधिकार से जुड़ी बातें

  • 16 अप्रैल 2001 को गठित राज्य आयोग में अब तक 55 हजार 141 प्रकरण दर्ज
  • इनमें 54 हजार 440 प्रकरणों का निराकरण
  • प्रतिदिन 10 से 15 शिकायतें
  • प्रतिवर्ष लगभग 2500 प्रकरण दर्ज
  • संवाद पत्रकों से प्राप्त गम्भीर सूचनाओं पर आयोग द्वारा तत्काल कार्यवाही

शिकायतें व प्रकार
लगभग 350 प्रकार से अधिक वर्गीकरण में शिकायतें

  • बच्चे - 40 प्रकार
  • महिलाएं - 15 प्रकार
  • लेबर - 20 प्रकार
  • शरणार्थी (रिफयूजी) - 10 प्रकार
  • धार्मिक/साम्पदायिक प्रकरण - 10 प्रकार
  • पुलिस अभिरक्षा - रक्षा - 30 प्रकार
  • एससी-एसटी - 10 प्रकार


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Stop the slaughter of Ravana - Human Rights Commission will now strictly follow such complaints


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