शहर के वाचनालय से लगे स्थल पर बाल उद्यान निर्माण होना है लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी बाल उद्यान के नाम पर केवल बाउंड्रीवॉल का ही निर्माण हो पाया है। निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। नगरपलिका के अफसरों के अनुसार बाल उद्यान बनाने जितनी राशि का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था वह पूरी नहीं मिल पाई है। पार्षद निधि से जितनी राशि मिली उतना काम हुआ।
शहर के मांझापारा वार्ड में एक भी गार्डन नहीं है। यहां गार्डन बनाने की मांग लंबे समय से चल रही थी। बाल उद्यान बनाने डेढ़ साल पहले स्वीकृति मिली थी। पार्षद निधि से बाल उद्यान बनना था लेकिन इतने दिनों बाद भी बाल उद्यान के नाम पर केवल बाउंड्रीवॉल ही बन पाई है। उद्यान में फूलदार पौधे, बच्चो के लिए झूले के साथ पाथवे बनना है। बैठने के लिए कुर्सी आदि की भी व्यवस्था होना है। बाल उद्यान बनाने 6 लाख की लागत आनी है लेकिन पार्षद निधि में डेढ़ लाख रूपए ही मिल पाया। बाउंड्री में लगे गेट का ताला खुला रहता है जिससे रात में असामाजिक तत्व यहां बैठ शराब खोरी करते हैं। वार्ड के विजय जैन, जितेंद्र परिहार, दीपक फब्यानी ने कहा बाल उधान जल्द बनाने गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
अभी और काम होने बाकी हैं: नगरपालिका सब इंजीनियर कमलेश साहू ने कहा कि बाल उद्यान का 6 लाख का इस्टीमेट है जिसमें सेे सिर्फ डेढ़ लाख रूपए ही मिल पाए हैं। अगले बजट में पार्षद निधि के साथ अन्य मद से और राशि प्राप्त होने पर शेष काम को पूरा कराया जाएगा।
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