अनुसूचित जाति और जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनाना अब आसान हो गया है। राज्य शासन के निर्देश के बाद नगर निगम उन लोगों को मदद करेगा, जिनके मिसल दस्तावेज नहीं होने के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे थे। 1950 के बाद का जाति प्रमाण पत्र बनाने वालों से मिशल दस्तावेज मांगा जा रहा है। बिना इस दस्तावेज के प्रमाण पत्र ही नहीं बन पा रहा है। इसलिए प्रक्रिया को सरल करते हुए शासन ने निगम में आवेदन लेने के निर्देश दिए हैं।
निगम के सभी जोन दफ्तरों में आवेदन जमा किए जाएंगे। यहां आवेदनों की स्क्रूटनी और आवेदनकर्ता का सत्यापन निगम के अफसर करेंगे। इसके बाद सभी आवेदनों को एमआईसी और सामान्य सभा में मंजूरी दी जाएगी। सामान्य सभा की मंजूरी के बाद आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण रायपुर एडीएम कार्यालय भेजा जाएगा। प्रकरण को एडीएम कार्यालय भेजने से पहले निगम में किसी पूर्व नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी को निगम मुख्यालय में बुलाकर दस्तावेजों के परीक्षण के लिए शिविर लगाया जाएगा।
यहां सभी दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही उन्हें एडीएम दफ्तर भेजा जाएगा।
शासन के निर्देशानुसार ऐसे प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र जल्द बनाए जाएंगे। सोमवार को इस संबंध में निगम के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति विभाग की बैठक हुई।
ये है मिसल रिकार्ड
मिसल रिकार्ड को पी1 भी कहा जाता है। यह रिकॉर्ड 1929-30, 1938-39, 1942-43 के दौरान तैयार किया गया एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में किसानों के नाम और उनके मूल जाति का उल्लेख होता है। मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
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