ग्रेजुएशन और पीजी के टॉपरों की लिस्ट इस बार नहीं बनेगी। क्योंकि, छात्राें ने घर बैठे की परीक्षा दी। लिस्ट नहीं बनने से इस बार यह जानकारी मिलना मुश्किल है कि बीए, बीकॉम, बीएससी समेत अन्य कक्षाओं में इस बार का टॉपर कौन है? पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अफसरों का कहना है कि मेरिट लिस्ट के मुद्दे पर पिछले दिनों चर्चा हुई। इसमें सैद्धांतिक सहमति इस बात को लेकर बनी है कि इस बार कोई मेरिट लिस्ट नहीं बनाया जाए। क्योंकि, कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार परीक्षाएं अलग तरीके से आयोजित की गई।
रविवि से विभिन्न फाइनल सेमेस्टर परीक्षाओं के नतीजे जारी किए जा चुके हैं। वार्षिक परीक्षा के भी कई नतीजे जारी हो चुके हैं। इसे लेकर अब नजरें इस बार के टॉपरों पर है। लेकिन यह स्थिति अब साफ हो गई है कि इस बार विवि किसी भी तरह की मेरिट लिस्ट बनाने के लिए तैयार नहीं है। इसे लेकर माना जा रहा है कि टॉपरों की लिस्ट नहीं बनेगी। अफसरों का कहना है कि लिस्ट नहीं बनाने पर सैद्धांतिक सहमति है। जल्द ही इस संबंध में निर्देश जारी होंगे। गौरतलब है कि रविवि से यूजी व पीजी के कई कोर्स संचालित हैं। वार्षिक व सेमेस्टर परीक्षाओं के नतीजों के आधार मेरिट लिस्ट बनायी जाती है। इसी आधार पर विवि और उससे जुड़े करीब डेढ़ सौ कॉलेजों में टॉपरों को दीक्षांत समारोह में गोल्ड मैडल दिए जाते हैं। लेकिन इस बार लिस्ट बनने की संभावना नहीं है। इसलिए गोल्ड मैडल भी बंटना मुश्किल है। रविवि ही नहीं, राज्य के अन्य राजकीय विवि व उससे जुड़े कॉलेजों में भी इस साल एग्जाम फार्म होम पद्धति से पेपर हुए। इसलिए वहां भी मेरिट लिस्ट बनने की संभावना कम है।
पिछले कुछ बरसों में छात्राएं ही आगे
रविवि से हर साल टॉपरों की लिस्ट जारी होती है। पिछले कुछ बरसों में यह देखा गया है कि विभिन्न कक्षाओं में छात्राएं ही आगे रही हैं। ग्रेजुएशन की कक्षाएं हो या फिर पीजी की कक्षाएं, अधिकांश में छात्राएं ही टॉपर रही है। यही वजह है कि गोल्ड मैडल पाने वालों में छात्राएं ही आगे रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि छात्रों की अपेक्षा छात्राएं पढ़ाई को गंभीरता से ले रही हैं। इसलिए अधिकांश कक्षाओं में वे ही टॉपर बन रही हैं।
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