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जैतखाम पर पालो चढ़ाकर गुरु पूजा करेगा समाज, नहीं निकलेगी सतनाम शोभायात्रा

गुरु घासीदास की 264वीं जयंती शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस मौके पर शहर के सभी 18 जैतखामों में पालो (धर्म ध्वजा) फहराकर गुरु पूजा की जाएगी। वैसे तो इस दिन शहर में विशाल शोभायात्रा निकालने की परंपरा रही है जिसमें अलग-अलग इलाकों की झांकियां और पंथी दल शामिल होते हैं। इस बार कोविड 19 को देखते हुए सभी बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। केवल सादगीपूर्ण समारोह ही रखे गए हैं।
मुख्य समारोह न्यू राजेंद्र नगर स्थित सांस्कृतिक भवन प्रांगण में होगा। शाम 7 बजे यहां सतनामी समाज की 11 विभूतियों का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों सम्मान होगा। सीएम यहां बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहेंगे। अध्यक्षता मंत्री डॉ. शिव डहरिया करेंग। वहीं मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह और अमरजीत भगत विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। आयोजन समिति के अध्यक्ष केपी खंडे और प्रवक्ता चेतन चंदेल ने बताया, शुक्रवार दोपहर 2 बजे साहित्य संगोष्ठी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसमें देश-विदेश के साहित्यकार शिरकत करेंगे। संगोष्ठी का विषय ‘भारतीय समाज में सतनाम पंथ का प्रभाव’ रखा गया है। शाम 5 बजे 40 फीट ऊंचे जैतखाम पर क्रेन के सहारे पालो चढ़ाया जाएगा। इस दौरान भिलाई की अनुसूईया बंजारे एंड टीम भक्तिमय प्रस्तुति देगी। शाम 6 बजे से अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया है। इस दौरान डाॅ. जेआर सोनी द्वारा लिखित 5 ग्रंथों का विमोचन व आरके पाटले द्वारा संकलित सतनाम कैलेंडर 2021 का विमोचन किया जाएगा। कार्यक्रम में विधायक सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, महापौर एजाज ढेबर भी शामिल होंगे।

जानिए... सत्य की खोज में निकले घासीदास ने कैसे पंथ स्थापित किया
रविवि इतिहास अध्ययन शाला के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डीएन खुंटे ने बताया, 1756 में बलौदाबाजार के गिरौदपुरी में गुरु घासीदास का जन्म हुआ था। मां छोड़ गईं जब वे महज 9 माह के थे। सिरपुर की सफुरा से विवाह हुआ। 1807 में सत्य की खोज करने वे जगन्नाथ की यात्रा पर निकल गए। रास्ते में सारंगढ़ रियासत के कोसिर में जब ज्ञान की प्राप्ति हुई, उनके मुंह से अपने आप सतनाम शब्द निकल गया। यात्रा स्थगित कर यहीं से उन्होंने उपदेश देना शुरू कर दिया। सात सिद्धांत और 42 अमृत वाणियां देकर उन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना की।

शाम को 264 दीयाें से जगमग होगा खमतराई का जैतखाम
इस मौके पर खमतराई में सुबह 5 बजे पंथी दलों की अगुवाई में सतनाम प्रभात फेरी निकाली जाएगी। 264वीं जयंती के मौके पर जोड़ा जैतखाम के सामने शाम को 264 दीपक जलाए जाएंगे। खमतराई सतनामी समाज के अध्यक्ष सुरेश लहरे और सचिव गोविंद सोनवानी ने बताया, सुबह 8 से 10 बजे के बीच पंथी दलों द्वारा पंथी नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। दोपहर 12 बजे समाजजनाें की मौजूदगी में जोड़ा जैतखाम पर पालो फहराया जाएगा। इसके बाद गुरु प्रसादी की व्यवस्था भी की गई है। दोपहर 2 बजे के बाद भक्ति भजन के कार्यक्रम रखे गए हैं जो देर शाम तक चलेंगे। रात 9 बजे चौका आरती की जाएगी।

एक दिन पहले महिलाओं ने की पूजा, कुर्सी दौड़ भी
गुरुवार को राजश्री सद्भावना समिति ने न्यू राजेंद्र नगर में महिला-युवती और बच्चों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसकी शुरुआत बाबा घासीदास की पूजा से हुई। महिलाओं ने यहां कुर्सी दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में शिरकत की, तो बच्चों ने फैंसी ड्रेस कंपीटिशन में हिस्सा लिया। वहीं युवतियों ने अपनी रंगोली में गुरु घासीदास और उनके संदेशों को दिखाया। मुख्य अतिथि शकुन डहरिया थीं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भाप मशीन और मास्क तोहफे के ताैर पर दिया। इस दौरान चंपादेवी गेंदले, उमा भतपहरी, गिरिजा पाटले, सुशीला सोनवानी, सरस्वती राघव मौजूद रहीं।



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The Guru will worship the society by raising the Jaitkham, Satnam procession will not come out


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