बलरामपुर जिले में साढ़े तीन हजार लोगों को वन अधिकार के तहत पट्टा देने के लिए सभी एसडीएम और वन अधिकारियों ने अनुमोदन कर साल भर पहले ही दस्तावेजों आदिवासी सहायक आयुक्त को भेज दिया था, लेकिन इसके बाद एक बार फिर से सभी आवेदनों को दोबारा अनुमोदन के लिए भेजा गया और इसके बाद एसडीएम ने महज 1584 आवेदनों पर ही अनुमोदन किया और उन्हें मुख्यमंत्री के हाथों पट्टा जारी किया गया है। ऐसे में दो हजार पात्र हितग्राहियों को जांच और अनुमोदन के नाम पर उलझाने की तैयारी चल रही है, इससे लोगों में नाराजगी है और हितग्राहियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को खुश करने व दिखावे के लिए मंच से वन अधिकार का प्रमाण पत्र जारी किया है। कांग्रेस के सत्ता में आने के साठ ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी कलेक्टर को आदेश दिया था और कहा था बेवजह और अनावश्यक कारण बताकर जिन वन अधिकार अधिनियम के तहत हितग्राहियों का पट्टा जारी नहीं किया गया उनकी जांच कर पट्टा दिया जाए। इस पर तत्काल राजस्व अमला और वन अधिकारियो ने मौका जांच किया और इससे पहले ग्राम पंचायतों में वन समितियों ने अनुमोदन किया। इसके बाद पूरे जिले में साढ़े तीन हजार ऐसे हितग्राही मिले जो पात्र थे लेकिन कलेक्टर ने सहायक आदिवासी आयुक्त को निर्देश दिया कि एक बार फिर से अनुभाग स्तर पर एसडीएम व रेंजर व एसडीओ से अनुमोदन कराकर भेजा जाए। हद तो यह है कि बेवजह बार बार अनुमोदन के पचड़े के कारण इस बार 35 सौ में महज 1584 आवेदनों का ही अनुमोदन किया गया है। सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग शर्मा का कहना है कि कलेक्टर के आदेश पर दोबारा अनुमोदन के लिए भेजा गया है।
फारेस्ट ने नहीं किया है अनुमोदन, बनती है विवाद की स्थिति
बता दें कि राजपुर ब्लॉक में वन विभाग ने एक भी वन भूमि के हितग्राही के लिए अनुमोदन नहीं किया है। जबकि एसडीएम के माध्यम से ही अनुमोदन के लिए वन विभाग को भेजने के आदेश थे। हितग्राहियों का कहना है कि इस पर तत्काल कार्यवाही हो और उन्हें पट्टा जारी किया जाये।
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