चंद्राकर का आरोप- वन गमन पथ में जो नाम वे किसी शोध में ही नहीं; कांग्रेस का पलटवार- राम के नाम का चंदा खाने वाले हिंदू धर्म का अपमान कर रहे
भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मस्थली पर छिड़े विवाद के बाद शनिवार को पूर्व संस्कृति व पर्यटन मंत्री अजय चंद्राकर ने राम वन गमन पथ पर सवाल खड़े किए। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदा लेने के लिए सीएम भूपेश बघेल नया इतिहास लिख रहे हैं। राम वन गमन पथ में जिन स्थानों को शामिल किया गया है, उनका उल्लेख आज तक हुए शोध में कहीं नहीं है। पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने चंद्राकर का समर्थन करते हुए कहा है कि वे ज्ञानी व्यक्ति हैं। उनका अध्ययन है। इस बात के प्रमाण चंद्राकर के पास मौजूद हैं। किसी को शंका हो तो वे वन टू वन जाकर बात कर सकते हैं। इस पर सीएम भूपेश बघेल ने भी पूर्व सीएम व भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि रमन सिंह 15 साल मुख्यमंत्री रहे, लेकिन राम वन गमन पथ नहीं बना पाए। आज जब पर्यटन और संस्कृति के हिसाब से हम इसे डेवलप कर रहे हैं तो इनको पीड़ा क्यों होनी चाहिए। अपनी नाकामी को स्वीकार करना चाहिए। इसके बाद कांग्रेस ने भी खुलकर हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा है कि राम के नाम पर चंदा खाने वाले अब हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं।
15 साल की सत्ता जाने से मानसिक दिवालियापन
कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने पलटवार किया है कि कमीशनखोर नेता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की माता देवी कौशल्या की जन्मस्थली पर विवादित बयान देकर सनातन धर्म और राम भक्तों का घोर अपमान कर रहे हैं। भगवान राम के नाम पर चंदा लेने वाले भाजपा नेता अहंकार में उल-जलूल बयानबाजी कर हिंदू धर्म का अपमान कर रहे हैं। भाजपा नेता 15 साल की सत्ता जाने के बाद दिमागी दिवालियापन के शिकार हो चुके हैं। वहीं, जाेगी कांग्रेस के प्रवक्ता भगवानू नायक ने कहा कि माता कौशल्या के जन्मस्थान के नाम पर भाजपा और कांग्रेस राजनीति बंद करे।
चंदखुरी ही जन्मस्थली, सियासत पड़ेगा भारी: बैस
बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता श्याम बैस ने मीडिया से बातचीत में माता कौशल्या की जन्मभूमि को लेकर बयानबाजी की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि चंद्रखुरी ही माता कौशल्या की जन्मस्थली है। वहां सातवीं शताब्दी का मंदिर इसका प्रमाण है। बैस ने पूर्व मंत्री चंद्राकर और कांग्रेस नेताओं को चेताया कि इस मामले पर सियासत करना उन्हें भारी पड़ेगा। बैस ने कहा कि रामायण से छत्तीसगढ़ के संबंधों को लेकर एक हजार पृष्ठ की शोध परक किताब लिखी गई है। इससे पहले तक कभी माता कौशल्या को लेकर कंठ नहीं फूटते थे।
राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश
पूर्व मंत्री चंद्राकर ने कहा कि चंदखुरी में माता कौशल्या का मंदिर है, न कि वह जन्मस्थान है। सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। छत्तीसगढ़ में माता कौशल्या के नाम से जो भी किवदंतियां हैं, जो भी लेखन, जो भी इतिहास है, उसकी किताब हम दे देते हैं, जिसमें कहा गया है कि तोसला जनपद की वह कन्या थी और उत्तर कौशल के राजा से ब्याही गई थीं। कांग्रेस के पास कोई तथ्य हैं, चंदखुरी के बारे में कोई लिखा है तो ये तथ्य वो रख दें, नहीं तो किसी शोध करा लें।
चंदखुरी के आसपास सदियों पुराना इतिहास, मंदिर किनारे खनन कराया जाना चाहिए: शर्मा
देश के वयोवृद्ध पुरातत्वविद पद्मश्री अरूण कुमार शर्मा का कहना है कि चंदखुरी के आसपास सदियों पुराना इतिहास है। माता कौशल्या के मंदिर किनारे खनन कराया जाना चाहिए। वहां अवश्य ही हजारों साल पुराने प्रमाण सामने आएंगे। अयोध्या में राम मंदिर के लिए खुदाई करने वाले पद्मश्री शर्मा के मुताबिक सिरपुर की तरह चंदखुरी व आरंग के आसपास जो कुछ निकलेगा उससे लोग चकित रह जाएंगे। आरंग के आसपास पुलिस लाइन की तरफ भी बहुत से प्रमाण भरे पड़े हैं। वहां चांदी-सोने के सिक्के मिले हैं। गांव होने के सबूत मिले हैं। चंदखुरी में मंदिर के अवशेष भी हैं। शर्मा का कहना है कि इस तरह के प्रस्ताव हर साल जुलाई में केंद्र सरकार को भेज दिए जाने चाहिए ताकि पुरातत्व विभाग अनुमति मिलने पर वहां काम कर इतिहास को लोगों के सामने ला सके, लेकिन यहां अफसर ऐसा नहीं कर रहे। प्रदेश के एक और वयोवृद्ध पुरातत्वविद का कहना है कि जानकी माता मंदिर के पास एक रहवासी टीला और शिव मंदिर होने के भी अवशेष हैं। अगर वहां सर्वे हो, तो जानकारी निकल सकती है। यदि यहां से प्रस्ताव जाता है तो भारत सरकार स्थल निरीक्षण कराएगा। सर्वे में यह पता चल सकेगा कि यहां खनन होना चाहिए या नहीं। परफेक्ट एक्सपर्ट की टीम बनाकर काम करना चाहिए। ऐसे जानकारों की छत्तीसगढ़ में कमी नहीं है।
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