गोलबाजार में मटका मार्केट के पास पार्किंग बनाई जा सकती है। साथ ही यहां पर खाली जगह में महिलाओं के लिए पिंक टायलेट बनाने की भी योजना है। इसके लिए यहां सालों से काबिज करीब दर्जनभर मटका-चुकिया, झाड़ू आदि बेचने वालों को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जा सकता है। महापौर एजाज ढेबर ने सोमवार को निरीक्षण के दौरान यहां कारोबार करने वाले सभी लोगों को बुलाकर इस योजना पर उनकी राय ली। सभी ने सहमति दी है, लेकिन यह शर्त रखी है कि उनका व्यवस्थापन गोलबाजार के भीतर ही किया जाना चाहिए।
गोलबाजार में दुकानदारों को मालिकाना हक देने और रजिस्ट्री से पहले दुकानों का रिकार्ड तैयार करने के लिए निगम के राजस्व विभाग ने सोमवार से नापजोख शुरू की। महापौर एजाज ढेबर ने आज पूरे बाजार का निरीक्षण किया और कारोबारियों से चर्चा की। महापौर ने कहा कि स्मार्ट गोलबाजार में अपने भविष्य व रोजगार को लेकर किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं। आज नापजोख की आज सिर्फ औपचारिक शुरुआत हुई। एक दुकान को नापकर दुकानदार का रिकार्ड तैयार किया गया। एेसे सभी 960 कारोबारियों की फाइल तैयार की जाएगी। इसी आधार पर रजिस्ट्री के लिए कारोबारियों की दुकानों की कीमत तय की जाएगी। महापौर एजाज ढेबर के साथ निगम के राजस्व विभाग की अध्यक्ष अंजनि राधेश्याम विभाग और रास्व विभाग का अमला भी मौजूद था। महापौर ने मौके पर खड़े होकर एक दुकान की नापजोख कराई और कारोबारी से दुकान के दस्तावेज लिए। राजस्व अफसरों ने बताया कि ऐसे हर कारोबारी की नापजोख कर और उनसे दस्तावेज लेकर फाइल तैयार की जाएगी।
छोटी सी दुकान भी कई बार बिकी
करीब सौ साल पुराने गोलबाजार का स्वरूप पहले बहुत अलग था। गोलबाजार में शुरुआत में कारोबार करने वाले उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान से रायपुर आए। गोल गुंबद के चारों तरफ एक लाइन से बांस-बल्ली से टपरी बनाकर उन्होंने बाजार बसाया और कारोबार शुरू की। धीरे-धीरे शहर में बसाहट बढ़ती गई और कारोबारी अपने रिश्तेदार, परिचितों को बुलाते गए और उन्होंने धीरे-धीरे पूरे गुंबद को ही घेर लिया। पहले यहां दुकानें होने के बावजूद गुंबद के पास बैलगाड़ी और तांगे तक पहुंच जाते थे। अंग्रेज अपने घोड़े यहीं पर बांधते थे। उस समय यह शहर का एकमात्र बाजार था, इसके बावजूद यहां सबकुछ व्यवस्थित था। आज बाजार में एक साथ दो लोगों का चलना भी मुश्किल होता है। नगर निगम बाजार की व्यवस्था सुधारने की तैयारी कर रहा है। 1950 से पहले भी बाजार की स्थिति आज जैसी नहीं थी।
बाजार के भीतर आमने-सामने दुकानों के बीच कम से कम 15 से 20 फीट की दूरी होती थी। बाजार के भीतर यह जगह चलने-फिरने के काम आती थी।
3 से हजार फीट तक दुकानें
गोलबाजार में छोटी से छोटी दुकान लगभग तीन से चार फीट की है और बड़ी दुकानें हजार से 1200 वर्गफीट की है। मालवीय रोड की तरफ कुछ कपड़ा दुकानों की लंबाई चौड़ाई काफी ज्यादा है। भीतर भी कुछ बड़े कारोबारियों के पास इतनी बड़ी दुकानें हैं, जिन्होंने तीन और चार मंजिला बिल्डिंग बना ली है।
अवैध दुकान तोड़ने के निर्देश
गोलबाजार में पुरानी मंदिर के पास कुछ लोग अवैध निर्माण कर दुकान बना रहे थे, जिसकी शिकायत निरीक्षण के दौरान की गई। विभाग की अध्यक्ष अंजनि राधेश्याम विभाग ने जोन-4 के राजस्व विभाग को निर्देश दिया कि तत्काल इसकी जानकारी लेकर संबंधित निर्माण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
"दुकानों की नापजोख शुरू की गई है। इसी आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। बाजार से किसी भी कारोबारी को हटाया नहीं जाएगा। पसरा लगाने वालों को भी व्यवस्थापित किया जाएगा और खाली जगहों पर पार्किंग तथा महिलाओं के लिए पिंक टायलेट बनाए जाएंगे।"
-एजाज ढेबर, महापौर रायपुर
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