अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के संक्रमण से शहरवासियों को खतरा नहीं होगा। इसके लिए जल्दी ही शहर स्थित भिट्टीकला के पास स्थित डंपिंग ग्राउंड पर इंसीनरेटर की स्थापना की जाएगी। एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार सरकार की ओर से जनसुनवाई संबंधित प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और पर्यावरण स्वीकृति मिलते ही यूनिट लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसमें संभाग के सभी जिलों के अस्पतालों व क्लीनिक से निकलने वाले कचरे का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए अस्पतालों को एक निश्चित रकम का भुगतान करना पड़ेगा। अभी तक शहर के दो अस्पतालों में ही कचरा निस्तारण की निजी व्यवस्था है। मालूम हो कि अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का उचित निस्तारण के लिए एनजीटी की ओर से विशेष नियम बनाए गए हैं। इसके तहत प्रत्येक 75 किमी की परिधि में इंसीनरेटर की स्थापना करने के निर्देश हैं। इसी क्रम में सरगुजा संभाग के लिए इंसीनरेटर यूनिट की स्थापना अंबिकापुर में की जाएगी। वीएम टेक्नोसॉफ्ट कंपनी संयुक्त उपचार सुविधा के तहत यहां यूनिट की स्थापना करेगी। इसके लिए नगर निगम से भिट्टीकला स्थित डंपिंग ग्राउंड में एक एकड़ जमीन भी एलॉट कर दी है।
टेंडर और जनसुनवाई की प्रक्रिया हो चुकी पूरी
अधिकारियों ने बताया कि यूनिट लगाए जाने के लिए प्रस्ताव बनने के साथ टेंडर और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब सिर्फ पर्यावरण स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। अगले दो से तीन महीने में यहां मेडिकल कचरे का निस्तारण शुरू हो जाएगा। यह यूनिट मेडिकल कचरे को जीवाणुरहित करने के साथ ही जलाने की प्रक्रिया भी पूरी करेगी।
कचरे को 1100 डिग्री के तापमान पर करेंगे भस्म
यूनिट और अस्पतालों का अनुबंध होगा। इसमें अस्पतालों से बेड के हिसाब से और क्लीनिक से मासिक रूप से चार्ज लिया जाएगा। इसके बाद यूनिट के कर्मचारी संभाग के बलरामपुर, सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया जिले के सभी अस्पतालों में जाकर कचरा एकत्र कर यूनिट में लाएंगे। यहां यूनिट में कचरे को 1100 डिग्री और 950 डिग्री के तापमान पर भस्म किया जाएगा।
विलियन पद्धति से करते हैं कचरे का निस्तारण
इंसीनरेटर नहीं होने के कारण मेडिकल कचरे का निस्तारण अस्पताल अपनी निजी व्यवस्थाओं से करते हैं। पर्यावरण विभाग के निर्देशानुसार अस्पताल अपने ही परिसर में गड्ढा खोदकर विलियन पद्धति से केमिकल ट्रीटमेंट की प्रक्रिया अपनाते हैं। इसमें कचरे को गड्ढे में डालकर केमिकल की मदद से प्लास्टिक व अन्य जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है।
अभी शहर के दो अस्पतालों में लगे हैं इंसीनरेटर
अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में अंबिकापुर के दो अस्पतालों में खुद के इंसीनरेटर लगे हुए हैं। इसमें जिला अस्पताल में और होली क्रॉस अस्पताल में खुद का इंसीनरेटर है, जहां इनका कचरा भस्म किया जाता है। लेकिन, नए इंसीनरेटर की स्थापना के बाद इन अस्पतालों की यूनिट का उपयोग नहीं किया जाएगा। इन अस्पतालों को भी केंद्रीय रूप से यूनिट के पास ही कचरा निस्तारण के लिए भेजना होगा।
संक्रमण और जीवाणुओं से मिलेगी मुक्ति
क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी एसके वर्मा ने बताया कि इंसीनरेटर की स्थापना के बाद सभी अस्पतालों से कचरा एकत्र किया जाएगा। इससे इधर-उधर फेंके जाने की आशंका खत्म हो जाएगी। मेडिकल कचरा सार्वजनिक स्थानों पर फेंके जाने से आम लोगों को संक्रमण का खतरा रहता है। वर्तमान में कोरोना जैसी महामारी के दौरान विशेष एहतियात बरती जा रही है। इससे जीवाणुओं से मुक्ति मिलेगी।
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