जिला मुख्यालय के सुपनार में स्थित रेत खदान में गुरुवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। ठेकेदार द्वारा वाहनों में रेत बिना लोडिंग किए 200 प्रति घन मीटर लिए जाने के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी ट्रांसपोर्टर्स रेत ढुलाई करने खदान नहीं पहुंचे।
ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि खदान ठेकेदार द्वारा प्रति घन मीटर रेत की मनमानी कीमत वसूलने की शिकायत माइनिंग विभाग व कलेक्टर को किए दो दिन बीत गए हैं। सरकारी दर 173.60 रुपए प्रति घन मीटर पर रेत मिलने तक वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
दो दिन से खदान बंद शासन को राजस्व का हो रहा नुकसान : रेत खदान ठेकेदार द्वारा तय सरकारी दर से दोगुने से भी ज्यादा कीमत वसूलने के विरोध में टांसपोर्टर्स ने बुधवार सुबह से ढुलाई नहीं करने का निर्णय लिया तो ठेकेदार के कर्मचारियोंे ने भी खदान बंद कर दिया। दो दिन से नगर में रेत सप्लाई ठप है। परिवहनकर्ता खदान से रोजाना 300 से 400 ट्रैक्टर रेत की ढुलाई कर लोगों तक पहुंचाते हैं। ढुलाई बंद होने से आम लोगों को तो परेशानी हो रही है साथ ही शासन को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
सरकारी दर पर मिले तो वे लोगों को 900 रुपए प्रति टैक्टर बेचेंगे: ट्रांसपोर्टर मनोज व राजकुमार ने बताया कि वर्तमान में उन्हें रेत खदान ठेेकेदार द्वारा बिना लोडिंग के 200 रुपए प्रति घन मीटर की दर से रेत दी जा रही है। एक ट्रैक्टर में तीन घन मीटर रेत लोड किया जाता है। वे बिना लोडिंग के ही ठेकेदार को 600 रुपए प्रति ट्रैक्टर दे रहे हैं। मजदूर एक ट्रैक्टर रेत लोड करने के 200 रुपए लेते हैं। इसके अलावा डीजल का 200 व ड्राइवर का खर्च कुल मिलाकर उन्हें एक ट्रैक्टर रेत लगभग 1000 रुपए मंे पड़ता है। दूरी के हिसाब से वे जरुरतमंदों को प्रति ट्रैक्टर रेत 1200 से 1400 रुपए में बेचते हैं। उन्हें प्रति ट्रैक्टर 100 से 150 रुपए की कमाई होती है। दिनभर में वे 6 से 8 फेरे लगाते हैं। टांसपोर्टरों ने बताया कि अगर उन्हें लोडिंग के साथ तय सरकारी दर 173.60 रुपए में रेत मिलेगी तो लोगों को 280 से 300 रुपए घन मीटर में रेत उपलब्ध कराएंगे।
सरकारी दर से अधिक पर रेत बेचा तो ठेका निरस्त होगा
जिला खनिज अधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि टांसपोर्टरों की शिकायत मिली है। ठेकेदार को नोटिस जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने को कहा गया है। तय सरकारी दर 173.60 रुपए प्रति घन मीटर से अधिक दर रेत नहीं बेचने की सख्त हिदायत ठेेकेदार के कर्मचारियों को दी गई है। खदान बंद होने से शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसलिए ठेकेदार व उनके कर्मचारियों को शुक्रवार सुबह से खदान चालु करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में शिकायत सहीं पाए जाने पर ठेका निरस्त कर दोबारा टेंडर बुलाया जाएगा।
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