बहुत से गांवों में बस्ती से दूर जंगल में गोठान बना दिए जाने से पशुपालकों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसी गांव में ऐसी जगह गोठान बना दिया गया है जहां तक जाने में रास्ते में पड़ने वाली नदी में पुल नहीं होने से मवेशियों को वहां तक ले जाना संभव नहीं हो पा रहा है। गोठान दूर तथा पहुंचविहीन होने से पशुपालक गोबर बेचने तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इस वर्ष जुलाई माह से गोधन न्याय योजनांतर्गत गोठान में गोबर खरीदी भी शुरू की गई है। ग्राम पंचायत पुसवाड़ा में बस्ती से दूर मारीपारा जंगल में गोठान बनाया गया है। बस्ती से दूरी अधिक होने की वजह से पशुपालक अपने मवेशियों को यहां नहीं भेज रहे थे। दूरी अधिक होने की वजह से गांव के 150 में से 100 से अधिक पशुपालक गोबर बेचने नहीं पहुंच पा रहे हैं।
यही कारण है की गांव के पशुपालक बस्ती के बीच गोबर खरीदी केंद्र खोलने की मांग कर रहे हैं। गांव के हरीचंद साहू, विष्णु सिंह वट्ट ने कहा घर में मवेशी तो है लेकिन अभी तक एक बार भी गोबर बिक्री नहीं किए हैए क्योकि गांव का गोठान यहां से 3 किमी दूर है। गांव के कमल सिंह कोसम ने कहा गोठान बस्ती से दूर होने के कारण पशुपालकों को परेशानी हो रही है।
नदी में पुल नहीं होने से परेशानी : ग्राम लालमाटवाड़ा के छोटे पारा में गोठान बनाया गया है लेकिन गांव के बड़ेपारा के पशुपालक यहां गोबर बेचने या अपने मवेशियों को नहीं भेज पा रहे हंै।
कारण गांव को दो भागों में बांटने वाली चिनार नदी में पुल नहीं है। पुल नहीं होने से खासकर बारिश के दिनों में तो छोटेपारा पहुंच पाना परेशानी वाला काम है। बड़ेपारा के 40 पशु पालकों को गोधन न्याय योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि बड़ेपारा के लोगों को गोठान पहुंचना हो तो नंदनमारा होते 9 किमी का सफर तय करना पड़ता है जो मुश्किल वाला काम है। बड़ेपारा के जगदीश साहू ने कहा उनके पास 25 मवेशी हैं लेकिन नदी में पुल नहीं होने से छोटेपारा गोठान नहीं जा पा रहे हैं। गांव के कौशल सोनकर ने कहा उनके पास 30 मवेशी हैं लेकिन नदी पर पुल के अभाव में गोठान तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
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