शहर समेत जिले भर मेंं लगने वाले मेले को लेकर संशय खत्म हो गया है। कोरोना काल में इस साल जिलेे में कहीं भी मेले का आयोजन नहीं होगा। कोरोना ने सालों से चले आ रहे मेला के इतिहास को बदल दिया। पहली बार होगा कि मेलाभाटा में इस बार साल के पहले रविवार को सन्नाटा पसरा रहेगा। प्रशासन ने मेले के लिए परंपरा का निर्वहन करने सिर्फ पूजा पाठ की ही छूट दी है वह भी कोरोना के नियमों तहत।
कोरोना को लेकर जिले में मेला को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी कि मेला का आयोजन होगा कि नहीं। दिसंबर के आते ही व्यापारियों तथा आमजनता में इसे लेकर चर्चा जोर पकड़ने लगी थी। जिला मुख्यालय व आसपास के ब्लाक मुख्यालय तथा कस्बों में लगने वाले बड़े मेले के आयोजन को लेकर आयोजनकर्ता व व्यापारी जिला प्रशासन से संपर्क कर रहे थे। प्रदेश स्तर से इसके लिए अबतक कोई दिशा निर्देश नहीं आने से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब भी मेले को लेकर प्रदेश से कोई ऐसा आदेश नहीं आया है लेकिन जिला प्रशासन ने मेले को लेकर अपना रूख स्पष्ट करते कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा, क्योंकि मेले में काफी भीड़ जुटेगी जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं होगा। इसमें यदि कोई संक्रमित व्यक्ति आ गया तो वहां संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। मेला में न सिर्फ कांकेर के बल्कि बाहर से व्यापारी व घूमने वाले भी पहुंचेगें। सभी पर कोरोना को लेकर नजर रख पाना व जांच करना काफी मुश्किल होगा। जिले में कोरोना संक्रमण काफी हद तक कंट्रोल किया जा चुका है। मेले आदि के चलते इस मेहनत पर पानी फिर सकता है।
ऐसा होगा इस बार मेले का स्वरूप
इस साल अबतक जिला प्रशासन ने किसी को मेला लगाने अनुमति नहीं दी है। मेला स्थलों में देव, आंगा व डांग आदि की पूजा के लिए निर्धारित संख्या में गायता, पुजारी, ग्राम प्रमुख व अन्य लोग जुटेेंगे। मेला स्थल में दुकानें व मनोरंजन के लिए लगने वाले झूले आदि नहीं लगेंगे। 29 दिसंबर को नरहरपुर का मेला आयोजित किया जाएगा। समिति ने यहां परंपरा के तहत पूजा पाठ करने की सूचना प्रशासन को दी है।
इधर सड़क से हटाई गईं दुकानें
कांकेर मेला के कुछ दिन पहले से ही पुल के निकट अस्पताल के पास से नेशनल हाईवे में कपड़ा, चप्पल समेत अन्य दुकानें लगनी शुरू हो जाती है। मेला आयोजन के संशय के बीच यहां दुकानें लगनी शुरू हो गई थी। सोमवार को नगर पालिका ने सड़क किनारे लगी इन दुकानों को हटा दिया। दुकान हटाने का दूसरा कारण ट्रेफिक व्यवस्था दुरूस्थ करना भी बताया जा रहा है।
मेला नहीं होने से लाखों का नुकसान भी
मेला नहीं लगने से सबसे ज्यादा झूले व मीना बाजार आदि लगाने वालों को नुकसान होगा। साल भर विभिन्न धाार्मिक अवसर जैसे नवरात्री, दुर्गा पूजा व अन्य आयोजन में मीना बाजार लगाया जाता है जो मार्च से बंद पड़ा है। इससे कांकेर जिले में मीना बाजार व झूला लगाने वालों को अबतक 12 से 15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इस ग्रुप से करीब 300 लोग जुड़े हैं। मीना बाजार संचालक सजन सिन्हा ने बताया अन्य जगह जो नुकसान होता है उसका जिले के कुछ बड़े मेले से भरपाई जाती है। इस बार यह भी संभव नहीं है। अब तक काफी नुकसान हो चुका है।
परंपरा का निर्वहन करने पूजा पाठ की होगी अनुमति : कलेक्टर चंदन कुमार ने कहा कोरोना काल व संक्रमण को देखते जिले में मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। संस्कृति व परंपरा का निर्वहन करने पूजा पाठ आदि के आयोजन की अनुमति होगी। इसमें भी निर्धारित संख्या में सोशल डिस्टेंस का पालन करते आयोजन करना होगा।
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