जीवित किसान को पटवारी ने मृत घोषित कर धान बेचने से वंचित कर दिया। वही गिरदावरी के लिए शासन की ओर से बनाए गए धान पंजीयन पोर्टल में सॉफ्टवेयर और पटवारियों की लापरवाही के कारण सैकड़ों किसानों का रकबा घटा दिया गया है।
जिससे आए दिन तहसील कार्यालय का चक्कर काटने को किसान मजबूर हो रहे हैं। वहीं तहसीलदार की ओर से संतोषप्रद जवाब नहीं मिलने के कारण किसान और भी परेशान हो रहे हैं। प्रदेश सरकार ने पिछले दो सालों के दौरान धान खरीदी में नई-नई नीतियां लागू की हैं। जिसके क्रम में किसान धान बेचने में काफी परेशान हो रहे हैं। वहीं रकबा कम होने के कारण सरकार के प्रति आक्रोश पनप रहा है। इस साल सरकार ने किसानों की फसल का निरीक्षण कर गिरदावरी करने का फैसला लिया था। जिसमें राजस्व अमले के पटवारी सहित तमाम आला अधिकारियों ने गिरदावरी करते हुए कई किसानों का रकबा जीरो कर दिया। इसके साथ ही कई किसानों को पटवारियों की लापरवाही के कारण जीवित होने के बाद भी मृत घोषित भी कर दिया है। इसका उदाहरण लखनपुर विकासखंड के धान खरीदी केंद्र समिति चांदो के ग्राम ईरगवा में देखने को मिला। जहां किसान सोमवार साय पुत्र जगमोहन को पटवारी ने किसानों की सूची में मृत घोषित कर इसकी जानकारी धान खरीदी केंद्र में दे दी है। पटवारी की इस लापरवाही में महेश का न तो मृत्यु प्रमाण पत्र लिया गया और न ही आसपास के किसानों व गांव के सरपंच से पुष्टि की गई। इस कारण किसान का रकबा और धान खरीदी पंजीयन से हटा दिया गया है। इसके बाद से पीड़ित किसान तहसील कार्यालय में दो-तीन दिन से चक्कर लगा रहा है। जिसके बाद कुछ लोगों से मुलाकात कर उसकी परेशानी एसडीएम प्रदीप साहू सेबताई गई। इसके बाद पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन एसडीएम ने दिया है। इसी तरह अन्य किसान भी लगातार कार्यालय का चक्कर काटते नजर आ रहे हैं और तहसीलदार की ओर से उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है।
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