6 साल पहले पिता के दो भाइयों की नक्सलियों ने बेरहमी से हत्या की, नक्सलियों के किए ब्लास्ट में पिता घायल हुए, प्रताड़ना व भय से तंग आकर परिवार ने गांव छोड़ा और अब वही नक्सल पीड़ित बेटी पिनकोंडा की नेहा नायक भी डॉक्टर बनने के सपनों को पूरा करने उड़ान भर चुकी है। प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए जिन छात्रों की पढ़ाई का ज़िम्मा सरकार ने उठाया है, उसमें नेहा भी शामिल है। गुरुवार को काउंसिलिंग प्रक्रिया में शामिल होने दंतेवाड़ा के 5 छात्र- छात्राओं को राजस्थान के जयपुर भेजा गया है। ये सभी बच्चे गुरुवार को फ्लाइट से जयपुर के लिए रवाना भी हुए। ये वे बच्चे हैं जो रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण काउंसिलिंग से वंचित हो गए थे।
इन बच्चों को देश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने की कोशिश में प्रशासन जुटा हुआ है। 26 दिसंबर को जयपुर में काउंसिलिंग होनी है, इन सभी को फ्लाइट से जयपुर भेजा गया है। कलेक्टर दीपक सोनी, सीईओ अश्वनी देवांगन ने सभी को बधाई दी। रवानगी के वक्त उनके परिजन भी दंतेवाड़ा पहुंचे। कहा कि प्राइवेट कॉलेज की फीस सुनकर ही बच्चों के डॉक्टर बनने की सारी उम्मीदें टूट चुकी थीं, पता चला कि सरकार ने पढ़ाई खर्च का भी जिम्मा ले लिया है तो बहुत खुशी हुई।
5 साल की बच्ची अनायशा ने भी कहा- ऑल दि बेस्ट
छू लो आसमान के पांचों छात्र- छात्राओं की जयपुर रवानगी से पहले कलेक्टर दीपक सोनी ने सभी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि बिना किसी चिंता के काउंसिलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लें। पिता को बधाई देते देख 5 साल की बेटी अनायशा भी पहुंच गई और उसने भी सभी छात्रों को ऑल दि बेस्ट कहते हुए बधाई दी। जो बच्चे जयपुर भेजे गए हैं उनमें कुआकोंडा का सुधीर कुमार, झोड़ियाबाड़म गांव की अनिता यादव, आंवराभाटा का जयंत मरकाम, गीदम की समृद्धि श्रीवास्तव व पिनकोंडा की नेहा नायक शामिल हैं।
भावुक हुईं मां, बोलीं- नक्सल हिंसा का दर्द झेला है
बेटी को जयपुर जाने विदा करने आई छात्रा नेहा नायक की मां काफी भावुक हो गईं। मां जेसली नायक ने कहा कि नक्सल हिंसा का बड़ा दर्द झेला है। बेटी नीट में क्वालीफाई हुई तो बहुत खुशी हुई थी। जब सरकार ने मदद की घोषणा की तो बेटी के डॉक्टर बनने की आस जाग गई।
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