केन्द्रीय कृषि कानून के विरोध में उग्र आंदोलन कर रहे किसानों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना मददगार साबित हो सकती है। दरअसल किसानों के आंदोलन को रोक पाने में असफल हो रही मोदी सरकार ने राज्य सरकार से इस पूरी योजना की जानकारी मांगी है। अफसरों ने बिना देरी किए योजना की पूरी डिटेल केन्द्र सरकार को भेज दी है।
एक ओर जहां देश के कई राज्यों के किसान उग्र आंदोलन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने में लगे हैं। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में किसान लगातार दो साल से 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से अपना धान बेच रहे हैं। केन्द्र सरकार की मनाही के बाद भी राज्य सरकार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के माध्यम से किसानों को समर्थन मूल्य की अंतर की राशि दे रही है। इसी तरह केन्द्रीय कानून का प्रदेश के किसानों पर कोई असर न हो इसके लिए राज्य सरकार ने मंडी एक्ट में संशोधन भी कर दिया है।
इसका असर यह हुआ कि किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर रही मोदी सरकार का ध्यान भी छत्तीसगढ़ सरकार की किसान न्याय योजना की ओर गया। इसके बाद केन्द्र सरकार ने तत्काल राज्य के संबंधित विभाग के अफसरों से इस पूरी योजना का खाका ही मंगा डाला।
ऐसी है राजीव न्याय योजना
दरअसल केन्द्र सरकार ने इस साल धान का समर्थन मूल्य समान्य धान के लिए 1868 तथा ग्रेड ए के लिए 1888 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। जबकि राज्य सरकार किसानों से 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। केन्द्र के एमएसपी और राज्य की एमएसपी के अंतर की राशि देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना की शुरुआत की है। इसके माध्यम से किसानों को चार किस्तों में अंतर की राशि दी जा रही है।
इस साल 90 लाख टन खरीदी
दरअसल छत्तीसगढ़ में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की शुरुआत एक दिसंबर से हो गई है। अब तक 18 लाख टन धान की आवक हो चुकी है। 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही खरीदी के कारण इस साल दो लाख से ज्यादा नए किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। इस साल लगभग 22 लाख किसान अपना धान बेचेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी किसानों को अपने गांव के नजदीक धान बेचने की सुविधा हो इसका ध्यान रखते हुए 2305 धान खरीदी केन्द्र बनाए हैं।
केंद्र ने मांगी जानकारी
"केन्द्र ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना की पूरी जानकारी मंगाई है। चूंकि योजना कृषि विभाग के माध्यम से चलाई जा रही इसलिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेकर केन्द्र सरकार को भेज दी गई है।"
-कमलप्रीत सिंह, खाद्य सचिव-छत्तीसगढ़
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