अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी से संबद्ध 198 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में स्नातक में लगभग 40 हजार सीटें हैं। पिछले तीन सालों में कॉलेजों में बीएससी बायो और गणित में एडमिशन लेने छात्रों की सीट से 32 गुना ज्यादा तक आवेदन आ रहा है। मेरिट के आधार पर एडमिशन हो रहा है और शहर के बड़े कॉलेजों में 80 प्रतिशत कटऑफ तक सीटें भर जा रही हैं। रिजल्ट भी अच्छा रह रहा है, पर स्थिति ये है कि इन छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पा रहा है। साइंस कॉलेज, जेपी वर्मा कॉलेज, बिलासा गर्ल्स कॉलेज, सीएमडी, डीपी विप्र, डीएलएस, एसबीटी शहर के बड़े कॉलेज हैं। फीस भी ज्यादा है, परंतु साल में एक भी कंपनी इन कॉलेजों में प्लेसमेंट के लिए नहीं आ रही हैं। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। सभी कॉलेज टीस के भरोसे हैं। अटल यूनिविर्सटी के टीचिंग डिपार्टमेंट से लेकर जीडीसी, साइंस कॉलेज, सीएमडी और डीपी विप्र कॉलेज को मिलाकर तीन साल में टीस भी मात्र बीए, बीएससी, बीकॉम के 193 छात्रों का प्लेसमेंट करा पाई है। इसमें भी छात्रों का ऐसी कंपनी में प्लेसमेंट हुआ कि उन्हें बीच में ही छोड़ना पड़ा। वहीं बिलासा गर्ल्स कॉलेज का दावा है कि उनके यहां की 70 से अधिक छात्राओं का प्लेसमेंट हुआ है। शासकीय कॉलेजों की स्थिति ये है कि यहां अधिकांश विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं। प्राइवेट कॉलेज एडहॉक शिक्षकों को भरोसे चल रहा है। इससे छात्रों का सिलेबस तक पूरा नहीं हो पा रहा है। बिना 75 प्रतिशत उपस्थित के छात्र परीक्षा में बैठ जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी अपना रिजल्ट सुधारने के लिए थोड़ी सी भी गुंजाइश होने पर छात्रों को पास कर दे रही है।

नैक ग्रेडिंग में दिखाना होगा प्लेसमेंट : नैक ग्रेडिंग में प्लेसमेंट कॉलेजों की गुणवत्ता का अहम पैमाना है। एयू से संबद्ध 11 से अधिक कॉलेजों को इस सत्र में नैक ग्रेडिंग होनी है। अगर प्लेसमेंट की स्थिति खराब है तो इसका असर ग्रेडिंग पर पड़ेगा।
एक्सपर्ट व्यू - मांग के अनुसार चालू करना होगा कोर्स: प्रो. शर्मा
अटल यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. जीडी शर्मा ने कहा कि पारंपरिक कोर्स चल रहे हैं। छात्र अभी बिना सोचे समझे एडमिशन ले रहा है। एडमिशन के पहले छात्रों की काउंसिलिंग जरूरी है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में अब देश या प्रदेश की कंपनियों में मांग के अनुसार कोर्स चालू करने की जरूरत है। तभी प्लेसमेंट का स्तर बढ़ेगा। अभी छात्र बीए, बीएससी और बीकॉम कर रहा है और उनका प्लेसमेंट मार्केटिंग के क्षेत्र में हो रहा है। जिससे वहां वह टिक नहीं पा रहे हैं। बीच में ही छोड़ दे रहे हैं।
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