जिले में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी तो शुरू हो गई है पर जिले के कई किसान ऐसे हैं जो कि धान की फसल लेने के बाद भी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। इन किसानों को सोसाइटियों से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारियों ने खेती का रकबा घटा दिया है। सालों से जिस जमीन पर किसान खेती कर रहे हैं और हर साल धान बेचते आए हैं। इस बार रिकॉर्ड में रकबा ही गायब कर दिया गया है। इसके चलते अन्नदाता धान नहीं बेच पा रहे हैं। इन्हें टोकन जारी नहीं हो रहा है।
यही वजह है कि आए दिन सोसाइटियों में टोकन को लेकर विवाद की स्थिति बन रही है। भास्कर ने इस शिकायत को लेकर पड़ताल की तो पता चला कि पटवारियों की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार ही रकबा देखकर किसानों को टोकन जारी किया जा रहा है। रकबा के हिसाब से धान की मात्रा तय हो रही है। किसान जब सोसाइटी पहुंच रहा है तब पता चल रहा है कि जिस रकबे में हर साल धान की खेती करते आ रहे थे, उस रकबे में कटौती कर दी गई है।
टोकन लेने सोसायटी पहुंचे तो भर्री बता दिया
ढाबा सोसाइटी में मिले मोतीपुर के किसान जीवन यादव ने बताया कि हर साल चार एकड़ धान की फसल लेते आ रहे हैं और इसी रकबे के हिसाब से धान बेचते थे पर इस बार आधा एकड़ रकबा पंजीयन में नहीं दिख रहा है। इसलिए पूरा धान बेच ही नहीं पाएंगे। मोहला क्षेत्र के हर्राटोला निवासी किसान सोहन सिंह खिलवारे ने बताया कि 4 एकड़ 24 डिसमिल जमीन है। टोकन लेने सोसायटी पहुंचे तो बताया गया कि रिकॉर्ड में 50 डिसमिल भर्री बता रहा है। इसलिए किसान इस बार एक दाना धान नहीं बेच पाएंगे। यह सुनकर उक्त किसान की नींद उड़ गई है।
11 एकड़ रकबा नहीं बताने की शिकायत
खैरागढ़ क्षेत्र के नवागांव निवासी किसान आनंद साहू ने बताया कि परिवार में दो पर्चा है। एक पर्चा में 2 एकड़ 8 डिसमिल रकबा है। दूसरे पर्चे में 11 एकड़ 10 डिसमिल रकबा का रिकॉर्ड है। टोकन लेने के दौरान सिर्फ 2 एकड़ का ही रिकॉर्ड बताया गया। 11 एकड़ रकबा पंजीयन के रिकॉर्ड से गायब है। इसकी शिकायत की है।
मुढ़ीपार में सोयाबीन की फसल ली ही नहीं
मुढ़ीपार के एक किसान के पास 2 एकड़ 81 डिसमिल खेती की जमीन है। सालों से इस रकबे में धान के अलावा दूसरी फसल नहीं ले रहे हैं। किसान ने बताया कि 27 नवंबर को टोकन लेने समिति पहुंचे तो बताया गया कि इस रकबे में सोयाबीन की फसल का रिकाॅर्ड है। इसलिए धान का टोकन नहीं मिलेगा। वे धान नहीं बेच पाए हैं।
कलेक्टर बोले- आदेश आया है, सुधार कराएंगे
कलेक्टर टीके वर्मा का कहना है कि रकबा कम होने और किसानों का नाम कट जाने संबंधित शिकायतें कुछ जगहों से मिल रही है। शासन स्तर से निर्देश आया है कि संबंधित किसानों से आवेदन लेकर जांच कराएं और कहीं रकबा कम हुआ है तो उसमें सुधार कराएंगे।
षडयंत्र है, प्रदेशभर में यही हाल: डॉ. रमन
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार ने षड़यंत्र के तहत रकबे में कटौती की है ताकि पूरा धान खरीदना न पड़े। दुर्भाग्यजनक यह है कि किसान जब धान बेचने जा रहा है तब बता रहे हैं कि रकबा कम है। पूरा का पूरा रकबा गायब होने से किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं।
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