शासन आबादी भूमि में काबिज लोगों को भूमि अधिकार पट्टा देने योजना लाई है। लेकिन इसके भारी भरकम राजस्व के चलते गरीब तबके के लोग योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जिन लोगों ने पट्टा लेने रुचि दिखाई है, वे अधिकांश व्यापारी वर्ग व संपन्न परिवार के ही है। यही कारण है कि शहर में 600 लोगों को भूमि अधिकार पट्टा के लिए प्रशासन ने नोटिस दिया है, लेकिन इसमें से सिर्फ 153 लोगों ने ही पट्टा लेने सहमति जताई है।
शहर में आबादी भूमि में बसे लोगों को पटटा देने 2019 में सर्वे करवाया गया। इस दौरान लोगों को निशुल्क पट्टा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन शासन ने योजना का स्वरूप में परिवर्तित करके पट्टा पाने की पात्रता के लिए भूमि के बाजार मूल्य के बराबर मूल्य के 152 प्रतिशत का राजस्व भुगतान करने आदेश दिया। इसके चलते लोगों ने पट्टा लेने को लेकर रुचि ही नहीं दिखाई।
राजीव गांधी आश्रय योजना का सिर्फ 61 को लाभ
शहर में राजीव गांधी आश्रय योजना में 61 लोगों को ही पट्टा मिल पाया है। जबकि काफी लोगों ने इसके लिए मांग की है। इस योजना में काफी कम रियायत में पट्टा दिया जाता है। इसमें प्रति वर्ग मीटर में 10 रुपए का भुगतान करना है।
लाखों नहीं पटा सकते, इसलिए नहीं ली रुचि
लट्टीपारा के कन्हैया प्रधान ने कहा बड़े शीतला मंदिर में पुजारी है। मेरा घर खपरैल का है। मेरे पास 12 लाख70 हजार राजस्व जमा करने का नोटिस आया है। इसे जमा कर पट्टा ले पाना संभव नहीं है। इसके चलते पट्टा लेने को लेकर रुचि नहीं दिखा रहे।
गरीब वर्ग कहा से लाएगा इतनी बढ़ी राशि
अघन नगर वार्ड राजमिस्त्री सियाराम मंडावी ने कहा उन्हें 22 लाख 71 हजार 681 रुपए का नोटिस दिया गया है। मजदूरी कर परिवार पालते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि कहा से लाएंगे। इसके चलते वे पट्टा लेने की सोचना नहीं बंद कर चुके हैं।
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