धनंजय शर्मा | कोयलीबेड़ा में बेहद संवेदनशील परतापपुर से कोयलीबेड़ा 30 किमी सड़क निमार्ण कार्य 2010 में स्वीकृत हुआ था। नक्सल गतिरोध तथा ठेकेदार की लापरवाही के चलते सड़क निर्माण शुरू ही नहीं हो पा रहा था। विभाग ने नई निविदा निकाली। 2020 में फोर्स की सुरक्षा में सड़क का काम शुरू हुआ।
इस सड़क के निर्माण के दौरान अब तक 90 बम बरामद हो चुके हैं तथा 10 से अधिक फोर्स-नक्सली मुठभेड़ हो चुकी है। अब सड़क निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ चुका है तथा 2021 में सड़क निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
कोयलीबेड़ा-परतापुर सड़क निर्माण पर नजर
- मार्ग की लंबाई - 31 किमी
- प्रथम टेंडर - 31 मार्च 2010
- कार्य की लागत - 40 करोड़
दूसरे ठेकेदार ने काम लिया
- लागत - 34 करोड़
- कार्य का अनुबंध - 7 सितंबर 2018
- समयावधि - 6 जून 2020 थी जिसे बढ़ाकर 30 जून 2021 की गई
50 से अधिक गांव के लोगों को मिलेगा फायदा
प्रतापपुर से कोयलीबेड़ा 30 किमी सड़क बन जाने के बाद परतापपुर, मुसरघाट, महला, कटगांव, कामतेड़ा, उदनपुर, मुरनार, जिरामतराई, कोयलीबेड़ा, वाला, कांटाबॉस, मिंडी, गोटांज, गट्टाकाल, दोडग़े सहित आसपास गांवों में रहने वालों को लाभ होगा।
कोयलीबेड़ा जाने के लिए 120 किमी की दूरी तय करना मजबूरी
सड़क और पुल निर्माण के लिए दो अतिरिक्त बीएसएफ कैंप करकाघाट और तुमीर घाट में स्थापित किए हैं। बीएसएफ केप खोले जाने के बाद काम के तेजी आएगी। वर्तमान में एक ही विकासखंड के दो प्रमुख स्थानों कोयलीबेड़ा से पखांजूर पहुंचने अंतागढ़-केंवटी कर 120 किमी का सफर तय करना होता है। इस मार्ग के बन जाने से कोयलीबेड़ा तथा पखांजूर की दूरी मात्र 40 किमी हो जाएगा। यानी कोयलीबेड़ा तथा पखांजूर की दूरी में 80 किमी की कमी आएगी। पखांजूर में बैठे अफसरों को कोयलीबेड़ा क्षेत्र की पंचायतों का दौरा करने 120 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
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