परलकोट क्षेत्र में मत्स्य विभाग द्वारा तालाब व डबरी निर्माण में अनुदान फर्जीवाड़ा का सिलसिला रूकने का नाम नहीं ले रहा है। मामला विधानसभा में गूंजने के बाद विभाग के एक अधिकारी तथा दो निरीक्षकों को निलंबित किया गया था। कार्रवाई के कुछ दिनों बाद फिर से विभाग के अधिकारी कर्मचारियों तथा दलालों के मिलीभगत से फर्जीवाड़े का खेल शुरू हो गया है।
डोटोमेटा में दलाल द्वारा महिला के नाम तालाब खोदने जारी अनुदान की राशि हड़पने के मामले में भास्कर ने पड़ताल की तो पता चला नया तालाब खोदे बिना महिला के खेत में स्थित 7 साल पुराने तालाब को ही नया तालाब दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया था। पुरे प्रकरण में विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की भी संलिप्तता स्पष्ट नजर आ रही है।
ग्राम डोटोमेटा निवासी सियाबाई कोर्राम के नाम से मत्स्य विभाग ने नील क्रांति योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए नया तालाब बनाने प्रकरण तैयार किया। तालाब के नाम से योजना के तहत 1.68 लाख का अनुदान जारी किया गया। अनुदान राशि का चेक विभाग के कर्मचारियों ने महिला को नहीं देकर दलाल को दे दिया। दलाल ने चेक की जानकारी महिला को नहीं दी।
उसका खाता षडय़ंत्र के तहत पखांजूर के बजाए भानुप्रतापपुर में खुलवाते एटीएम भी जारी कराते अपने पास रख लिया। इसी एटीएम के माध्यम से दलाल ने महिला के खाते से अनुदान की राशि 1.68 लाख रुपए का गबन कर लिया। मामला जब उजागर हुआ तो प्रथम दृष्टया गबन का ही नजर आया लेकिन इसकी पड़ताल करने पर पता चला मामला सीध भ्रष्टाचार की भी है।
उक्त महिला के खेत में 7 साल पहले खोदा गया तालाब है। इसी तालाब को नया तालाब खोदना बनाते प्रकरण बनाया गया तथा अनुदान भी जारी कर लिया गया। इधर मत्स्य विभाग दावा करता है की अब नीलक्रांती योजना के तहत जितने भी नए प्रकरण बनाए जा रहे हैं उनमें तालाब का निरीक्षण करने के बाद ही अनुदान जारी किया जाता है।
इस मामले में विभाग के अधिकारियों ने या तो तालाब का निरीक्षण ही नहीं किया और किया भी तो भ्रष्टाचार में शामिल होते पुराने तालाब को नया तालाब बता दिया। उपयंत्री का भी दोष है जिसने फर्जी मूल्यांकन किया।
किसानों से अधिक दलालों व अधिकारियों का फायदा
केंद्र सरकार मत्स्य पालकों की जीवन में क्रांति लाने नील क्रांति योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए तालाब निर्माण करने 40 प्रतिशत अनुदान देती है। इससे किसानों के जीवन में क्या क्रांति आई इसका तो पता नहीं लेकिन योजना से विभाग के अधिकारी व क्षेत्र के दलाल जरूर फल फूल रहे हैं। वर्तमान में और कई तालाब चिह्नांकित हुए हैं जिनकी छूट की राशि बिना तालाब निर्माण के ही जारी कर दी गई है।
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