7 साल की मिस्का ने 195 देशों के फ्लैग पहचाने, उनके राष्ट्रीय खेलों के नाम भी बताए, इंडिया बुक ऑफ रिकाॅर्ड में नाम दर्ज
राजधानी के राजीव नगर में रहने वाली महज 7 साल की मिस्का अग्रवाल का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकाॅर्ड में दर्ज किया गया है। चेन्नई से आए प्रतिनिधियों के सामने मिस्का को यूएन रिकॉग्नाइज्ड 195 देशों के फ्लैग दिखाए गए, जिसकी उन्होंने महज पांच मिनट 6 सेकंड में पहचान कर ली। साथ ही उस देश के राष्ट्रीय खेल का नाम बताकर रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। मिस्का राजकुमार कॉलेज की पहली की स्टूडेंट हैं। रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्होंने दो महीनों तक ऑनलाइन क्लास भी ली है। मिस्का के पिता ट्रांसपोर्टेशन कारोबारी रवि अग्रवाल और मम्मी प्रीति अग्रवाल ने दावा किया कि ये अपनी तरह का पहला रिकॉर्ड है। इससे पहले यूएन रिकॉग्नाइज्ड 195 देशों के फ्लैग देखकर उस देश का नाम और राष्ट्रीय खेल बताने का रिकॉर्ड किसी के नाम दर्ज नहीं है।
कजिन ब्रदर और सिस्टर के नाम दर्ज है रिकॉर्ड उनसे प्रेरित होकर रिकॉर्ड बनाने का किया प्रयास
मिस्का के कजिन ब्रदर और सिस्टर के नाम रिकॉर्ड दर्ज हैं। चेन्नई में रहने वाली रवि की बड़ी बहन रिंकी के दो बच्चे हैं। दाेनाें के नाम अलग-अलग रिकॉर्ड दर्ज हैं। कोचीन में रहने वाली उनकी सिस्टर मीनाक्षी के बेटे के नाम फास्टेस्ट रुबिक क्यूब सॉल्व करने का रिकॉर्ड दर्ज है। रवि ने बताया कि मिस्का के टैलेंट और इन बच्चाें से प्रेरित हाेकर ही हमने रिकाॅर्ड बनाने की प्लानिंग की और कामयाब भी रहे। उन्होंने बताया कि अब एक से दो महीने बाद एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की तैयारी करेंगे।
दो शीट की मदद से करते थे तैयारी, कई बार पैरेंट्स से ही क्रॉस क्वेश्चन करने लग जाती थीं मिस्का
रिकाॅर्ड के लिए की गई तैयारियों के बारे मेें रवि ने बताया, दो महीने तक हम रोज मिस्का की रिहर्सल करवाते थे। हमने दो शीट प्रिंट करवाई थी। पहली शीट में सिर्फ फ्लैग थे, दूसरी शीट में फ्लैग के साथ देश और उसके राष्ट्रीय खेल का नाम था। मिस्का को सिर्फ फ्लैग वाली शीट देते और उससे देश और खेल का नाम पूछते। कई बार बच्ची खेल के मूड में आकर हमी से क्रॉस क्वेश्चन करने लगती।
रिकॉर्ड बनाने के लिए जाॅइन की ऑनलाइन क्लास, चेन्नई की टीचर ने 2 महीने कराई तैयारी
रवि अग्रवाल ने बताया, मिस्का किसी भी चीज को एक बार देख लेती है तो उसे भूलती नहीं। लॉकडाउन में वक्त मिला तो हमने दुनिया को उसके इस टैलेंट से वाकिफ कराने का डिसीजन लिया। रिकॉर्ड बनाने का ख्याल आने के बाद हमने मिस्का को चेन्नई की टीचर शरीफा से दो महीने ऑनलाइन क्लास दिलवाई। हफ्ते में तीन दिन एक-एक घंटे की ऑनलाइन क्लास होती थी। लॉकडाउन में रोजाना दो घंटे तक स्कूल की ऑनलाइन क्लास अटैंड करने की आदत के कारण मिस्का को ये क्लास अटैंड करने में भी दिक्कत नहीं हुई। क्लास लेने के पहले ही महीने में बच्ची को सभी देशों के नाम, फ्लैग और उस देश के राष्ट्रीय खेल याद हो गए थे। दूसरे महीने में हमने कम से कम समय में ये जानकारी लोगों को बताने की प्रैक्टिस की।
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