550 साल पहले तांत्रिक विधि से शहर के पहले दत्तात्रेय मंदिर की स्थापना... साथ में गुरु गोरखनाथ भी विराजमान
भगवान दत्तात्रेय की जयंती मंगलवार को मनाई जाएगी। शहर में भगवान दत्तात्रेय का इकलौता मंदिर ब्रह्मपुरी में है जहां 200 साल से जयंती उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। हालांकि, मंदिर का इतिहास इससे और पुराना है। इतिहासकारों का कहना है कि मंदिर साढ़े 5 सौ साल पुराना है। 200 साल पहले दत्तात्रेय के साथ गुरु गोरखनाथ की प्रतिमा भी स्थापित की गई।
ब्रह्मपुरी में इस मंदिर का निर्माण भोसले राजाओं के जमाने में हुआ था। बताते हैं कि तब यह पूरा इलाका जंगल था। मंदिर में नागा साधु रहा करते थे जो तंत्र क्रियाएं करते थे। इसी वजह से यहां लोगों का आना-जाना भी बहुत कम था। बाद में अनेक संप्रदाय को मानने वाले लोग मंदिर से जुड़े और साथ में अपने आराध्य की प्रतिमाएं भी स्थापित करवाई। मंदिर के ट्रस्टी हरिवल्लभ अग्रवाल बताते हैं कि 200 साल से मंदिर में सनातन पद्धति से पूजा हो रही है। आज मंदिर में भगवान दत्तात्रेय के साथ शिवजी और बाबा गोरखनाथ भी विराजमान हैं।
नए साल में शुरू होगा जीर्णोद्धार
काफी पुराना होने की वजह से मंदिर में कई जगह मरम्मत की जरूरत है। इसे देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का फैसला लिया है। जीर्णोद्धार जनवरी-फरवरी से शुरू हो सकता है। ट्रस्ट मंडल की योजना के मुताबिक गर्भगृह काे छोड़कर बाकी सभी हिस्सों की मरम्मत की जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में नए स्ट्रक्चर बनाने की भी योजना है।
हर साल 9 दिन तक भव्य उत्सव... इस बार सादगी से
मंदिर में हर साल 9 दिवसीय दत्तात्रेय जयंती उत्सव मनाया जाता है। इस बार भी उत्सव 9 दिन का ही रहा, लेकिन कोरोना को देखते हुए कम लोगों की माैजूदगी में सादगी के साथ मनाया गया। हर दिन महिलाओं की मंडली दोपहर में भजनों की प्रस्तुति दे रही है, तो शाम को विशेष पूजन-अनुष्ठान के साथ भगवान की आरती की जा रही है। सोमवार को मंदिर में बूढ़ापारा राम महिला मंडल और ब्रह्मपुरी महिला मंडल ने भजनों की प्रस्तुति दी। इस दौरान हेमा बर्वे, विनायक राव काकड़े, महेश राम साहू, विजय दुबे, गोपाल यादव आदि मौजूद रहे।
महाभंडारा रद्द... केवल ब्राह्मण भाेज, भक्तों को पैकेटबंद प्रसाद
कोरोनाकाल के चलते मंदिर में हर साल होने वाला महाभंडारा रद्द कर दिया गया है। करीब 10 हजार भक्त इसमें प्रसाद ग्रहण करते हैं। परंपरा का निर्वहन करने के लिए बुधवार को ब्राह्मणभोज करवाया जाएगा। वहीं भक्तों बिठाकर भोजन कराने की बजाय दोना पत्तल में ही प्रसाद का वितरण किया जाएगा ताकि प्रसाद लेकर भक्त अपने घर जा सके और मंदिर में भीड़ ना बढ़े। इस दौरान फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए मंदिर समिति ने अलग टीम भी तैयार की है।
आज गोपाल काला उत्सव के साथ पर्व का समापन
जयंती का मुख्य आयोजन 29 और 30 दिसंबर को होगा। सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि मंगलवार को गोपाल काला उत्सव के साथ 9 दिनी पर्व का समापन होगा। इससे पहले 8 दिन गुरु चरित्र का परायण, भजन, कीर्तन और प्रतिदिन महाआरती की गई। आखिरी 2 दिनों में प्रसाद बनाने के लिए भक्त घर से आटा, दाल, चावल, तेल, घी, हरी सब्जियां, मिर्च, हल्दी, मसाला आदि लेकर आए।
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