जिलेभर में 50 ऐसे गांव हैं जहां जलस्तर बढ़ाने तथा सिंचाई साधन के लिए वहां के नदी नालों में स्टाॅपडैम की मांग की जा रही है। सालों से वहां के ग्रामीण मांग कर रहे हैं लेकिन मांग पूरी नहीं हो पा रही है। जलसंसाधन विभाग ने भी ग्रामीणों की मांग के आधार पर प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा है लेकिन 50 में से मात्र दो स्थानों पर स्टाॅपडैम बनाने स्वीकृति मिल पाई है।
कांकेर विकासखंड में सर्वाधिक 16 स्थानों पर स्टाॅपडैम एनीकट बनाने की मांग है। इसी प्रकार नरहरपुर विकासखंड में भी 9 स्थानों पर स्टाॅपडैम एनीकट बनाने की मांग है। सत्र 2021-22 में जिले में मात्र दो स्थानों दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम रेंगाटोला तथा मदले में स्टापडेम बनाने की स्वीकृति मिली है। जिले में वर्तमान में 250 गांवो में स्टापडेम तथा 31 स्थानों पर एनीकट बने हुए हैं। वर्तमान में जिले में तीन स्टापडेम व दो एनीकट निर्माण कार्य जारी है। जिन गांवों में एनीकट की मांग हो रही है वहां नदियों में बारिश के मौसम में तो पानी रहता है लेकिन बारिश समाप्त होते ही पानी सूख जाता है। कई गांवो में तो बारिश के बाद ग्रामीण रेत से अस्थाई मेड़ बनाकर पानी रोकते हैं जिससे थोड़ी राहत रहती है लेकिन हर साल इस प्रकार की मेड़ बनाना पड़ता है।
सिंदुरी नदी में स्टाॅपडैम की मांग 15 साल पुरानी
ग्राम भीरावाही के सिंदुरी नदी में स्टाॅपडैम बनाने की मांग 15 सालों से की जा रही है। नदी तट में काफी सारे खेत है। बारिश के बाद सिंदुरी नदी में पानी रोकने रेत से मेड़ बनाई गई है। यहां स्टाॅपडैम बनने से ग्रामीणों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। पूर्व उपसरपंच उत्तम जैन ने कहा स्टापडेम की मांग को लेकर जल संसाधन विभाग के अफसरों के साथ जनप्रतिनिधियों कसे भी की जा चुकी है लेकिन मांग पुरी नहीं हो पा रही है। गांव के अनिरूद्ध सिन्हा, मनीराम नाविक, प्रकाश नाविक, गोकुल शोरी, दुलेश जैन ने कहा गांव में स्टापडेम की बहुत ज्यादा जरूरत है। ग्राम नंदनमारा के चिनार नदी के साथ सातलोर में भी स्टापडेम बनाने की मांग की जा रही है।
एक साथ स्वीकृति नहीं मिल पाती : जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आरआर वैष्णव ने कहा शासन से जितनी स्वीकृति मिलती है वहां निर्माण कार्य कराया जाता है। एक साथ सभी जगह स्टाॅपडैम बनाने स्वीकृति नहीं मिल पाती। इस सत्र में दो स्टापडेम के लिए स्वकृति मिली है जिसके लिए निविदा प्रकिया जारी है।
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