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3 साल में एसीबी ने 3 रिश्वतखोर ही पकड़े, इस साल एक भी नहीं

भ्रष्टाचार पर रोक लगाने को लेकर एक पूरा अलग महकमा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) चल रहा है। बीते 3 साल में पूरे संभाग में एंटी करप्शन ब्यूरो ने सिर्फ 3 ही रिश्वतखोरों को पकड़ा है। इस साल कोरोना महामारी के चलते एक भी मामला दर्ज नहीं किया जा सका है, जबकि साल 2018 में 1 और साल 2019 में सिर्फ 2 ही मामले एसीबी यानि एंटी करप्शन ब्यूरो के हत्थे चढ़े हैं।
बताया जाता है कि इनमें से दो मामलों में ट्रायल पूरा हो चुका है, जबकि एक मामले में आरोपी को सजा हो चुकी है। मालूम हो कि भ्रष्टाचार के मामलों को नियंत्रित करने के लिए एसीबी काम कर रही है, लेकिन स्थिति ये है कि रिश्वतखोरी की शिकायत के बावजूद एसीबी कार्रवाई नहीं कर रही है।

कहीं सुनवाई अटकी, कहीं चार्जशीट पेश नहीं
बताया जाता है कि बीते तीन सालों में महज 3 मामलों पर ही एसीबी ने ट्रैप करते हुए तीन रिश्वतखोर सरकारी अफसर-कर्मियों को दबोचा। हालांकि इन तीनों ही मामलों पर प्रकरण बनाकर मामला न्यायालय भी भेजा गया, जहां मामलों पर ट्रायल तो खत्म हो गया है, लेकिन अब तक आरोपी अफसर-कर्मियों पर दोष साबित ही नहीं हो सके हैं। साल 2018 कोंडागांव जिले में 1 अफसर को रंगे हाथ धरा गया था, जबकि साल 2019 में बस्तर जिले में दो मामलों पर कार्रवाई की गई, जिसमें एक आयुर्वेद औषधालय तो दूसरा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग का है। कोंडागांव जिले में रंगे हाथ धरे गए एक सरकारी मुलाजिम को न्यायालय ने सजा सुना दी है, लेकिन अब तक बस्तर जिले के दोनों मामलों में पकड़े गए 3 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल ही पूरा किया जा सका है।

2002 से 2015 के बीच के 13 मामले लंबित
साल 2002 से लेकर साल 2015 तक जहां कुल 13 मामले ऐसे थे, जो अब भी लंबित पड़े हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला जगदलपुर के तत्कालीन तहसीलदार ओपी धाभाई का है, जिन्हें एसीबी ने रिश्वत लेते पकड़ा। हालांकि बाद में वे रिश्वतखोरी के मामले में दोषमुक्त हो गए, लेकिन अब उन पर ईओडब्ल्यू ने आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा चलाया है। ये मुकदमा अब भी विचाराधीन है। और भी कई ऐसे मामले हैं, जिन पर अब तक फैसला नहीं आया।

लॉकडाउन में मिली 5 शिकायतें, कार्रवाई नहीं
इस साल एक भी मामला नहीं पकड़ा जा सका है। बताया जाता है कि कोरोना के कारण जहां शुरुआती लॉकडाउन के दौरान सभी महकमे बंद रहे, वहीं लॉकडाउन के दूसरे-तीसरे चरण में दफ्तरों को दोबारा शुरू किया गया। इस बीच सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर सहित अन्य जिलों से करीब 5 शिकायतें एसीबी को मिली हैं, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इन पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकी है। कोरोना के खत्म होने के बाद इन मामलों पर शिकायत की पुष्टि की जाएगी।

अभी कोर्ट का फैसला आना बाकी: एसपी
एसीबी के पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने बताया कि आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों के लिए एसीबी पूरी तरह से गंभीर है। दरअसल जिन मामलों पर दोष साबित नहीं हो सका है, उन पर फैसला सुनाने का अधिकार न्यायालय को है। इस पर वे कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी पूरी कोशिश होती है कि रिश्वतखोर अफसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि दूसरे अफसर-कर्मियों को उनसे सबक मिले।



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