जिले में शनिवार को कुल 28 नए कोरोना पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई। इसमें कांकेर ब्लाक के ही सबसे अधिक 17 मरीज शामिल हैं। जिसमें एक जिले के पूर्व विधायक का पुत्र भी है। इसके अलावा शादी में शामिल होकर लौटे श्रीराम नगर के एक परिवार में 6 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि अंतागढ़ में शनिवार को एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं पाया गया। जिले के लेबर अफसर भी पॉजिटिव पाए गए हैं। जो वर्तमान में अपने आरईएस कालोनी में होमआईसोलशन में हैं।
अफसर के अनुसार वे कहां से संक्रमित हुए हैं इसकी जानकारी नहीं है। आशंका है कि वे लांच के लिए मजदूरों के बीच जाते रहते हैं। जहां से संक्रमित हो गए होंगे। श्रीराम नगर में निवासरत एक ठेकेदार का पूरा परिवार 23 नवंबर को अपने रिश्तेदार की शादी में भिलाई गया हुआ था। जहां से 26 नवंबर को वह वापस अपने घर आया। लेकिन शादी के दौरान वहां परिवार के एक व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद ठेकेदार की 73 वर्षीय मां की तबियत खराब होने पर धमतरी के एक निजी अस्पताल में जांच कराई कराई गई।
जहां उन्हें पॉजिटिव पाया गया। धमतरी में ठेकेदार की भी जांच की गई उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिवार के बचे सदस्यों की कांकेर में जांच की गई। इसमें परिवार के अन्य चार सदस्य भी पॉजिटिव पाए गए। हालांकि श्रीराम नगर में पॉजिटिव पाया गया परिवार होम आइसोलेशन में है तथा सभी स्वस्थ्य हैं। इनमें कोरोना के लक्षण भी नहीं है। माहुरबंद पारा में एक शिक्षक को पॉजिटिव पाया गया है। दो दिन पूर्व इनकी मां को पॉजिटिव पाया गया था।
पोटगांव में जांच में देरी मृतक के परिवार में 3 पॉजिटिव
कांकेर विकासखंड के गांव पोटगांव में 4 लोगों को पॉजिटिव पाया गया है। जिसमें तीन एक ही परिवार के हैं। इस परिवार के कोरोना पॉजिटिव 42 वर्षीय शिक्षक पुरूष की 29 नवंबर को मौत हो गई थी। परिवार के सदस्यों ने बताया इसकी जानकारी विभाग को 1 दिसंबर को ही मिल गई थी। लेकिन जांच देरी से की गई। इसमें परिवार के तीन सदस्य पॉजिटिव पाए गए। इसके पहले शिक्षक पुरूष की भी जांच में लापरवाही बरती गई। जिले में कई बार जांच हुई लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई।
बाद में जब तबियत ज्यादा बिगड़ गई तो मरीज को धमतरी के निजी अस्पताल ले जाया गया। 6 दिन इलाज चला लेकिन सुधार नहीं हुआ। इसके बाद कोरोना की जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके बार रायपुर रेफर किया गया। जहां मरीज की मौत हो गई। परिवार ने कहा जांच में की गई लापरवाही के चलते असली बिमारी नहीं पता चली। जिससे परिवार की अपूर्णीय क्षति हुई है।
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