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ऑनलाइन कर्ज लिया नहीं, फिर भी सूदखोर 25-25 नंबरों से कर रहे तगादे के फोन, पैसे नहीं देने पर निजी तस्वीरें कर रहे वायरल

ऑनलाइन माइक्रो लोन का ट्रेंड शुरू होने के साथ ही ऑनलाइन सूदखोरी का रैकेट सक्रिय हो गया है। युवा और कॉलेज में पढ़ाई करने वाले उनका टारगेट हैं। शहर में दो सौ से ज्यादा युवाओं को ऑन लाइन सूदखोर कॉल कर चुके हैं। फोन पर वे बताते हैं कि आपने लॉकडाउन में 5 हजार कर्ज लिया था। अब आपको 10 हजार चुकाने हैं, जो पैसे नहीं दे रहे हैं कि उनके मोबाइल पर सेव सारे नंबरों और फोटो को हैक कर लिया जा रहा है। फिर उनके एक-एक परिचित को फोन कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। मोबाइल में सेव निजी तस्वीरों को भी वायरल किया जा रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस ने अब तक एक भी केस दर्ज नहीं किया है। पुलिस के इस रवैये से युवाओं के साथ उनके परिजन भी हैरान हैं। आखिर ऑनलाइन बदनामी करने वालों से किस तरह बचा जाए।


ऑनलाइन सूदखोर एक-दो नंबरों से नहीं 25-25 नए-नए नंबरों से सुबह से रात तक फोन कर रहे हैं। कई बार अपशब्दों का प्रयोग करने के साथ-साथ जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इससे भी सूदखोरों को तसल्ली नहीं हो रही है। युवाओं के मोबाइल पर सेव एक-एक नंबर पर कॉल करने के साथ वाट्सअप में मैसेज कर कर्ज लेने की झूठी बात बताकर बदनाम किया जा रहा है। एक युवक के तो प्राइवेट फोटो वायरल कर दिए गए हैं। सिविल लाइंस, डीडी नगर, सेजबहार समेत दो अन्य थानों में इस तरह की शिकायतें की जा चुकी हैं। हालांकि पुलिस ने किसी भी प्रकरण में केस दर्ज नहीं किया है। ज्यादातर को शिकायत आवेदन लेने के बाद लौटा दिया जा रहा है, कुछ थानों में बाकायदा लिखकर दे दिया जा रहा है कि ये प्रकरण पुलिस के हस्तक्षेप के योग्य ही नहीं है।

लॉकडाउन में निकला था ऑफर : पुलिस अधिकारियों ने बताया लॉकडाउन के दौरान मोबाइल एप के माध्यम से कुछ फाइनेंस कंपनियों ने माइक्रो लोन का ऑफर निकाला। इसमें किसी तरह के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं थी। एप डाउनलोड करना था। उसमें मांगी कुछ जानकारी देनी थी। फिर लोन मिल रहा था। माइक्रो लोन में 2-10 हजार रुपए का कर्ज दिया जा रहा था। ज्यादातर युवाओं ने एप के माध्यम से लोन लिया है। अब ऐसी कंपनियों का नाम लेकर ही ऑन लाइन सूदखोरी की जा रही है।
फोन पर पहले आग्रह फिर बदलते हैं तेवर : समीर जी (बदला हुआ नाम) नमस्कर... मैं माेमाे कंपनी से बाेल रहा हूं। आपने लॉकडाउन के दाैरान 5 हजार रुपए का लाेन लिया है। दाे महीने हाे गए हैं। आपने एक भी किश्त जमा नहीं की है। अगर पैसा नहीं लौटाएंगे तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। आपको जेल भेजा जाएगा...।

एप पर कर्ज लेने वाले और ऑनलाइन गेम खेलने वाले हो जाए सावधान : एसएसपी अजय यादव ने बताया कि मोमो समेत तकरीबन 55 से ज्यादा कंपनियों ने एप और लिंक माध्यम से माइक्रो लोन दिया है। इसमें ज्यादा फर्जी कंपनियां है। कंपनियों ने अपनी एडवांस तकनीक से एप डाउनलोड कराने का झांसा देकर मोबाइल का पूरा डेटा हैक कर लिया है। मोबाइल पर सेव कांटेक्ट नंबर, फोटो, वीडियो और बैंक से संबंधित कई अहम जानकारी ठगों के पास पहुंच गई है। कुछ मामले आए हैं, जिसकी जांच में साइबर सेल टीम को लगाई गई है। ऐेसे मामलों पर केस दर्ज किया जाएगा।

जानकारी वायरल करने की धमकी
राजातालाब का एक युवक सिविल लाइंस थाना पहुंचा। उसके पास राजस्थान से कर्ज चुकाने के लिए फोन आ रहा है। उसे धमकी दी जा रही है कि उसने 6 हजार का कर्ज लिया है और किश्त जमा नहीं की। उसे जेल भेजा जाएगा। उसकी व्यक्तिगत जानकारी वायरल की जाएगी। उसने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने खुद ठगों से बातचीत की, लेकिन केस दर्ज नहीं किया है।

रिश्तेदारों को भी कर रहे फोन
बिलासपुर के एक युवक को इसी तरह के कॉल आ रहे थे। उसने भी एक रुपए लोन नहीं लिया। इसके बावजूद युवक के मोबाइल पर सेव कुछ व्यक्तिगत फोटो थे, जिसे उसके मोबाइल पर जितने कांटेक्ट नंबर हैं, उन्हें फारवर्ड कर दिया गया है। युवक की पूरी छवि धूमिल कर दी गई है। उसके रिश्तेदारों को भी लगातार फोन किए जा रहे हैं।

साइबर एक्सपर्ट- जांच के बाद डाउनलोड करें एप
"एप या ऑनलाइन लोन लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए। कर्ज देने वाली कंपनी के संबंध में पूरी तरह पड़ताल कर लें कि वह रिजर्व बैंक से मान्यता प्राप्त है या नहीं। कंपनी फर्म में उसका रजिस्ट्रेशन भी चेक करें। एप-लिंक को डाउनलोड करते समय किस तरह की जानकारी या अनुमति मांगी जा रही है। कांटेक्ट नंबर को देखने की एप को कभी अनुमति नहीं देनी चाहिए। एप या ऑनलाइन कर्ज लेने से बचना चाहिए।"
-मोहित साहू, साइबर एक्सपर्ट



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थाने में ऐसा लिखकर दिया जा रहा है कि यह मामला पुलिस के हस्तक्षेप के योग्य ही नहीं है।


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