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अब डूमरतराई में 200 दुकानों का नया बाजार, शहर के थोक कारोबारियों को मिलेगी जगह

शहर के थोक बाजार को बाहर शिफ्ट करने की पहल एक बार फिर शुरू हो गई है। डूमरतराई में थोक बाजार के सामने निगम की खाली पड़ी लगभग छह एकड़ जमीन में 200 दुकानें बनाई जा रही हैं। इन दुकानों में थोक बाजारों को शिफ्ट किया जाएगा। इन दुकानों के लिए जगह का चयन कर लिया गया और बाजार बसने के बाद कारोबारियों की दूसरी सहूलियतों की प्लानिंग भी शुरू हो गई है। इसी हफ्ते निगम के प्रतिनिधियों और चैंबर आफ कामर्स के पदाधिकारियों की बैठक होगी, जिसमें तय हो जाएगा कि कौन से बाजार शिफ्ट होंगे? हालांकि निगम ने पंडरी कपड़ा मार्केट, गुढ़ियारी और रामसागर पारा के अनाज-किराना कारोबारी तथा ट्रांसपोर्टर्स को प्राथमिकता में रखा है।
पूरा प्लान यह है कि डूमरतराई में निगम के दो प्लाट हैं। एक प्लाट ढाई एकड़ का, जिसमें लगभग 80 दुकानें बनेंगी। दूसरा करीब साढ़े तीन एकड़ का, जिसमें 120 दुकानें बनेंगी। ढाई एकड़ के एक चक में एक ही तरह के सभी कारोबारियों को दुकानें दी जाएंगी। इसी तरह साढ़े तीन एकड़ के चक में 120 दुकानों में एक ही तरह के कारोबारियों को दुकान दी जाएगी। रविवार को मेयर के साथ राजस्व विभाग की चेयरमैन अंजनि राधेश्याम विभाग, चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा और निगम के अफसर निरीक्षण के लिए डूमरतराई पहुंचे। मेयर ने योजना विभाग के ईई राजेश शर्मा को निगम के साथ चैंबर पदाधिकारियों और व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। मेयर एजाज ढेबर ने स्पष्ट कर दिया है कि दुकानें सबसे पहले उन्हें दी जाएंगी जो निगम को पहले भुगतान करेगा।

दुकानें ज्यादा महंगी नहीं होंगी, बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम रहेगा
व्यस्त हो रही राजधानी के भीतर कारोबार करना अब मुश्किल हो गया है। ट्रैफिक की दिक्कत बढ़ने लगी है। इसलिए कुछ कारोबारियों ने भी चैंबर के माध्यम से इच्छा जताई है कि उन्हें शहर के बाहर दुकानें दी जाए। इसलिए निगम खाली प्लाट्स में दुकानें बनाने की प्लानिंग कर रहा है। मेयर ने कहा कि दुकानें ज्यादा महंगी नहीं होंगी। इसके अलावा कारोबार के लायक सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जिन प्लाट्स में दुकानें बनाई जा रही है वे मेन रोड से लगी हुई हैं। इसलिए कारोबारियों को किसी भी तरह की दिक्कत भी नहीं होगी।

पूर्व की कोशिशें नाकाम
नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड ने पूर्व में भी डूमरतराई में थोक बाजार बनाया है। धीरे-धीरे यह थोक बाजार बसने लगा है, लेकिन शहर से थोक बाजार कम नहीं हो रहा है। दरअसल, कारोबारियों ने डूमरतराई में दुकानें ले ली है और वे शहर के भीतर भी कारोबार कर रहे हैं। इस वजह से ट्रैफिक की दिक्कत दूर नहीं हो पा रही है। थोक बाजारों के कारण शहर के भीतर बड़ी-बड़ी गाड़ियां घुसती हैं। लोडिंग-अनलोडिंग की वजह से भी ट्रैफिक की परेशानी रहती है।

शहर में दर्जनभर थोक बाजार
राजधानी में दर्जनभर से ज्यादा थोक कारोबार चल रहे हैं। इनमें गुढ़ियारी-राम सागर पारा में अनाज और किराना तथा गल्ला कारोबारी, आलू-प्याज थोक कारोबारी, हार्डवेयर एंड मशीनरी, कपड़ा मार्केट, जूता-चप्पल, बंजारी थोक मार्केट, थोक दवा बाजार इत्यादि बाजार शहर के भीतर चल रहे हैं। इन सभी कारोबारियों को शहर के बाहर शिफ्ट किया जाना है। निगम डूमरतराई की इन 200 दुकानों में इनमें से किसी थोक बाजार को शत-प्रतिशत शिफ्ट करेगा।

ट्रैफिक दबाव घटेगा
"थोक बाजारों को बाहर ले जाना प्राथमिकता है, ताकि शहर में ट्रैफिक दबाव कम हो। निगम के खाली प्लाट में एक साथ 200 कारोबारियों को शिफ्ट करने का प्रोजेक्ट है। यह कामयाब रहा तो बाकी बाजारों के लिए भी प्लान बनेगा।"
-एजाज ढेबर, मेयर रायपुर



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अफसरों के साथ निरीक्षण करते मेयर।


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