सुसुाइड नोट में लिखा- दर्द इतना है कि सहन नहीं कर पा रहा हूं, किसी को बताया नहीं, क्योंकि पहले ही 20 हजार लग चुके हैं
बीईओ ऑफिस के प्यून ने हार्निया के दर्द से परेशान होकर खुदकुशी कर ली। उन्होंने छठघाट के जंगल में जाकर पेड़ पर फांसी लगाई। पुलिस को उनके जेब से सुसाइड नोट मिला है। इसमें अपने खुदकुशी करने की वजह बताई। वह सिविल लाइन थाना क्षेत्र का रहने वाला था। सिंधी कॉलोनी निवासी बजरंग लाल यादव पिता स्व गोवर्धन यादव 57वर्ष का बलराम टॉकीज के सामने मकान है।
वे बीईओ ऑफिस में प्यून थे। बुधवार की सुबह हर रोज की तरह करीब 10 बजे बैग लेकर ऑफिस जाने के लिए निकले पर रात तक घर नहीं लौटे। परिजनों ने खोजबीन की पर नहीं मिले। गुरुवार की सुबह सरकंडा क्षेत्र में मोपका से तोरवा जाने वाले मार्ग पर छठघाट के जंगल में उनकी पेड़ पर लटकी हुई लाश मिली। गले में लाल पीले रंग का गमछे से फंदा लगा हुआ था और इसका दूसरा छोर गुलमोहर की पेड़ पर लटका हुआ था।
सूचना मिलने पर सरकंडा पुलिस पहुंची और शव को नीचे उतरवाकर उनके पैंट-शर्ट की जेबों की तलाशी ली। पैंट की जेब में एक कागज मिला। इसके दोनों ओर पेन से चिट्ठी लिखी गई थी। पढ़ने पर पता चला यह सुसाइड नोट था। इसमें उनका नाम पता था। पुलिस ने उसी के आधार पर उनके घरवालों को सूचना दी। उनके आने पर कथित सुसाइड नोट को दिखाया।
टीआई जेपी गुप्ता के अनुसार उनके बेटे रमाकांत यादव ने राइटिंग की पुष्टि की। बेटे ने पुलिस को बताया कि उनके पिता अक्सर परेशान रहते थे पर किसी से कुछ कहते नहीं थे। अपेंडिस के ऑपरेशन कराने के बाद भी उन्हें दर्द से मुक्ति नहीं मिल रही थी। हार्निया क बारे में उन्होंने किसी को नहीं बताया। उन्हें देखकर नहीं लग रहा था कि वे अचानक सुसाइड कर लेंगे। पुलिस ने सुसाइड नोट को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।
एक बेटे व दो बेटियों के पिता थे
बजरंग लाल यादव एक बेटे व दो बेटियों के पिता थे। उनकी बड़ी बेटी की दो साल पहले 2018 में शादी हो गई थी। परिजनों के अनुसार शादी के बाद से उनकी मानसिक स्थिति कुछ ठीक नहीं रहती थी। बीमारी ने उन्हें और परेशान कर दिया था।
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