मेडिकल काॅलेज रायपुर में लगभग आठ महीने बाद एमबीबीएस की ऑफलाइन क्लासेस फिर से शुरू हो गई है। हर क्लासरूम, लैब, हॉल को सैनेटाइज करने के बाद क्लासेस शुरू की गईं। क्लास आने से पहले पैरेंट्स का सहमति पत्र और कोरोना रिपोर्ट सबमिट करने कहा गया था। पहले दिन लगभग 75 फीसदी स्टूडेंट्स कैंपस पहुंचे। जिन स्टूडेंट्स की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई, उन्हें कैंपस में एंट्री दी गई। वहीं, जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उन्हें फिट होने के बाद क्लासेस जॉइन करने कहा गया। सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए स्टूडेंट्स को 30-30 के ग्रुप में बांटा गया है। जिस लेक्चर हॉल में पहले 180 स्टूडेंट्स बैठते थे वहां केवल 30 स्टूडेंट्स को बैठने की अनुमति दी गई है। डीन डॉ विष्णु दत्त ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन किया जा रहा है। एंट्री गेट पर हैंड सैनिटाइज करना और मास्क पहनना अनिवार्य रखा गया है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए स्टूडेंट्स को क्लासेस खत्म होने के बाद बाहर न घूमने की हिदायत दी गई है। साथ ही कोरोना सिम्टम्स दिखाई देने पर तुरंत टेस्ट कराने कहा गया है।
ये हैं बड़े बदलाव
- पहले क्लास सुबह 9 से दोपहर 4 बजे तक लगती थी। अब दो शिफ्ट में सुबह 10 से 1 बजे तक और दोपहर 2 से 5 बजे तक लगेंगी।
- हर क्लास के स्टूडेंट्स को 30-30 के ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप राेटेशन सिस्टम के तहत अलग-अलग समय में पढ़ाई करेंगे।
- पहले जहां दिनभर में दो लेक्चर होते थे अब वहां 6 लेक्चर हो रहे है। वहीं, प्रैक्टिकल की 1 के बजाय 6 क्लास हो रही हैं।
- क्लासेस और प्रैक्टिकल के समय काे आधा कर दिया गया है।
- ऑनलाइन क्लासेस में जो पढ़ाया गया है, अगले कुछ दिन वही टॉपिक रिवाइज किए जाएंगे।
7 स्टूडेंट पॉजिटिव आने के कारण नहीं जॉइन कर सके क्लास : संस्थान में कुल 630 सीटें हैं, जिनमें से 180 सीट फर्स्ट ईयर की है। एडमिशन प्रोसेस पूरी नहीं होने के कारण फर्स्ट ईयर की क्लासेस अभी शुरू नहीं की गई हैं। एनाटॉमी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ मानिक चटर्जी ने बताया कि सेकंड ईयर के 180 में से 130 स्टूडेंट उपस्थित रहे। कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के कारण 7 स्टूडेंट क्लास जॉइन नहीं कर सके। थर्ड ईयर के 150 में से 120 स्टूडेंट्स क्लास पहुंचे।
ऐसे समझें क्लासेस का नया सिस्टम: सेकंड ईयर के एनाटॉमी डिपार्टमेंट में 180 स्टूडेंट हैं, जिन्हें 30-30 के कुल 6 ग्रुप में बांटा गया है। इनके 3 सब्जेक्ट हैं। नए सिस्टम के तहत एक ग्रुप पहले थ्योरी पढ़ेगा, फिर प्रेक्टिकल करेगा, फिर लैब में टेस्ट करेगा। यह प्रोसेस हर घंटे ये रोटेट होती रहेगी। इससे सभी स्टूडेंट की पढ़ाई हो पाएगी।
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