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बस्तर में 11 किसानों के खेत में होगा काला गेहूं

कोरोना से जूझ रहे जिलेभर के लोग इस समय खुद को स्वस्थ रखने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक किसानों को ऐसा अनाज उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए और किसानों की आमदनी में इजाफा करे। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों की बात मानते हुए बस्तर जिले के 11 किसानों ने पहली बार 14 एकड़ में काले गेहूं की खेती शुरू कर दी है।
कसान काले गेहूं की खेती महंगी होने के बाद भी आने वाले साल में और अधिक रकबे में इसकी खेती करने की बात कह रहे हैं। इस प्रजाति के गेहूं में प्रोटीन और एंटी ऑक्सीडेंट ज्यादा होते हैं। काले गेहूं की इस प्रजाति में आयरन, जिंक और एंटी ऑक्सीडेंट सामान्य गेहूं की प्रजातियों से ज्यादा हैं।
इसका बीज 6 से 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल है। इस प्रजाति का सामान्य उत्पादन 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ है। जबकि सामान्य गेहूं का उत्पादन बस्तर जिले में 7 से 10 क्विंटल है। उपसंचालक कृषि विकास साहू ने कहा कि किसानों की मांग को पूरा करते हुए उन्हें काला गेहूं का बीज उपलब्ध करवाया है। आने वाले दिनों में मांग बढ़ी तो किसानों को यह बीज उपलब्ध करवाया जाएगा।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने भोपाल से मंगवाए बीज
बस्तर के किसान काले गेहूं की खेती करने के लिए काफी लंबे समय से कोशिश कर रहे थे। उनकी इस इच्छा को ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी दौलत नेताम और चंद्रपाल सिंह ने पूरा किया। इन अधिकारियों ने यह बीज भोपाल से मंंगवाया और अब इसकी खेती सीड ड्रिल के माध्यम से करवा रहे हैं। सिंह ने बताया कि इस समय काले गेहूं की खेती जगदलपुर ब्लॉक के 2 और बकावंड ब्लॉक के 9 किसानों द्वारा की जा रही है। इसको बढ़ावा देने लिए किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र और एग्रीकल्चर कॉलेज के छात्रों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानक डॉ. आदिकांत प्रधान ने बताया कि काले गेहूं की खोज पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बॉयोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने की है। विशेषज्ञों का दावा है कि काले गेहूं खाने से शरीर को सही मात्रा में फाइबर प्राप्त होता है, जिससे पेट के रोगों में लाभ मिलता है।

कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारी के लिए फायदेमंद
किसान रैनू बघेल, सुमीत, दीपकेश सेिठया, गोविंद और अमित कुंवर ने बताया कि उन्होंने इस साल करीब 10 एकड़ में पहली बार काले गेहूं की खेती की है। जिसका फायदा उन्हें आने वाले सालों में मिलेगा। किसानों ने कहा कि काला गेहूं साधारण गेहूं से ज्यादा पौष्टिक है। यह गेहूं कैंसर, डायबिटीज, मोटापा, कोलेस्ट्रोल, दिल की बीमारी, तनाव आदि सहित 12 बीमारियों में मददगार साबित होगा।



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Black wheat will be in the field of 11 farmers in Bastar


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