3 इनामी सहित 10 नक्सलियों ने गुरुवार को दंतेवाड़ा पुलिस के सामने सरेंडर किया। सभी को समाज की मुख्यधारा में जुड़कर ईमानदारी से काम करने की शपथ दिलाई व प्रोत्साहन राशि दी गई। कलेक्टर दीपक सोनी ने रोजगार देने का वादा किया।
एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव ने कहा नक्सली अब अपने ही लोगों पर यकीन नहीं कर रहे। उन्हें प्रताड़ित कर रहे, उनकी हत्याएं कर रहे। यही इनका असली चेहरा है। इस मौके पर सीआरपीएफ डीआईजी विनय सिंह, एएसपी उदय किरण, राजेन्द्र जायसवाल, सीईओ अश्वनी देवांगन, एसडीओपी चंद्रकांत गवर्णा, डीएसपी अमर सिदार आदि मौजूद थे।
10 सालों तक नक्सलियों की गुंडाधूर स्कूल का टीचर रहा: सरेंडर करने वाले 8 लाख के इनामी नक्सली बामन सोढ़ी ने कहा कि 8वीं तक पढ़ाई की। साल 2007 को नक्सली उठाकर ले गए व संगठन में शामिल करा दिए। गुण्डाधुर स्कूल खोलकर टीचर बनाया। इसके बाद कई बड़ी घटनाओं में भी शामिल रहा। पुलिस मुखबिर बताकर पेड़ पर उल्टा टांगा व पिटाई की। 3 दिनों तक ऐसे ही रखा।
सरेंडर नक्सली का फोन नंबर रखने पर दी सजा
नक्सलियों के लिए काम करने वाले सीएनएम सदस्य मारजूम के रहने वाले नंदू मड़कामी पर नक्सलियों ने ही भरोसा नहीं किया। सालभर पहले सरेंडर किए नक्सली राजू मिडकोम का फोन नंबर रखने की ऐसी सजा मिली कि नक्सलियों ने इसे बांध दिया और शरीर पर 2000 से ज्यादा चींटियां छोड़ कटवाए। रातभर तड़पता रहा। मौका देख भागकर कटेकल्याण थाना पहुंचा और सरेंडर कर दिया। नंदू ने बताया कि इलाके का नक्सली मंगतू सहित और भी उसे कई दिनों से प्रताड़ित कर रहे थे।
जिसके लिए काम किया वो ही भरोसा नहीं करते
मिलिशिया कमांडर मंगू पोडियामी ने कहा कि नक्सलियों के लिए जान हथेली पर लेकर काम किया, लेकिन वे ही भरोसा नहीं करते इसलिए सरेंडर कर रहा। उसने टिकनपाल सहित अन्य गांवों के कुछ लोगों के भी नाम पुलिस को बताए।
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