देश के 115 आकांक्षी जिलों की अक्टूबर की डेल्टा रैंकिंग नीति आयोग ने जारी कर दी है। इस रैंकिंग में कोंडागांव जिले ने 103 जिलों को पछाड़ दिया और 4थे रैंक पर आ गया है। सितंबर के महीने में कोंडागांव जिला 107वें नंबर पर था। बताया जाता है कि कोंडागांव जिले में आए इस सुधार के लिए नीति आयोग ने 3 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मदद दी है।
इसके साथ ही नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने जिले में कुपोषण से मुक्ति और महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में किए गए कामों की सराहना भी की है। बताया जाता है कि मुख्य रूप से मिली अतिरिक्त मदद से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जाएगा। कोंडागांव कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि जिले में चलाए गए नंगत पीला अभियान के कारण कुपोषण में 14.60 प्रतिशत कमी आई है।
4 जिलों की रैंकिंग बिगड़ी, दो की सुधरी, लेकिन कोंडागांव में आया सबसे अच्छा सुधार: अक्टूबर के महीने की डेल्टा रैंकिंग में कोंडागांव जिले में खासा सुधार आया है, वहीं सुकमा, नारायणपुर जिलों में कुछ सुधार आया है। जबकि बस्तर, बीजापुर, कांकेर और दंतेवाड़ा जिला पिछड़ गया है। बस्तर जिला सितंबर में जहां 23वें नंबर पर था, ये गिरकर 30 पर आ गया है। ऐसे ही बीजापुर जिला 37वें से 81वें, कांकेर 53वें से 101वें और दंतेवाड़ा जिला 10वें स्थान से सीधे 108वें स्थान पर पहुंच गया है। इधर सुकमा जिला 92वें नंबर से 66वें में और नारायणपुर जिला 91वें से 89वें पर आया है।
शिविर लगाकर बच्चों में कुपोषण के कारण का पता लगाया
कोंडागांव कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों के कारण ही जिले का विकास तय मानकों के अनुसार किया गया है। यही कारण है कि आकांक्षी जिलों में कोंडागांव जिला देशभर में टॉप 5 में अपनी जगह बना पाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास को और तेज करते हुए जिले को सबसे ऊपर लेकर जाना है। उन्होंने बताया कि 0 से 5 साल तक के 57 हजार बच्चों के स्वास्थ्य की जांच कर कुपोषित बच्चों की पहचान की गई, जिसमें 19 हजार बच्चे कुपोषित मिले। बाद में शिविर लगाकर प्रश्नावली तैयार कर बच्चों में कुपोषण के मूल कारणों का पता लगाया गया और ऑनलाइन डाटाबेस तैयार करने के बाद ग्रामीण युवाओं को सुपोषण मित्र बनाकर इसे बढ़ावा देने का जिम्मा सौंपा गया। हर ग्राम पंचायत के लिए एक जिलास्तरीय नोडल अफसर नियुक्त किया गया, जो अभियान के निरीक्षण में लगे हुए हैं। कोरोना संक्रमण के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपोषण मित्रों, डाॅक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों सहित टीम ने काम किया।
प्रसव पूर्व जांच की संख्या 5 प्रतिशत बढ़ी
पहले तीन महीनों में प्रसव पूर्व जांच के लिए पंजीकृत महिलाओं में 5.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं का इलाज भी शत-प्रतिशत हुआ, जबकि पिछले महीने ये 67.7 प्रतिशत था। जन्म के समय लिंगानुपात 980 था, जो अब बढ़कर 1129 हो गया है। संस्थागत प्रसव 13.40 प्रतिशत से बढ़कर 98.87 प्रतिशत, 99.59 नवजात शिशुओं का वजन किया गया।
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