एनएच-33 किनारे कांशीडीह में सरकार की ओर से बनाए जाने वाले भारी वाहन चालक प्रशिक्षण केंद्र का स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दाैरान कांशीडीह ग्रामसभा के आह्वान पर 60 गांव के ग्रामीणों ने पारंपरिक हथियार के साथ प्रदर्शन किया। हाथों में तीर-धनुष लेकर लोग सड़क पर उतरे। यहां विभिन्न ग्राम प्रधानों और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की बैठक हुई, जिसमें प्रशिक्षण केंद्र योजना को कांशीडीह ग्रामसभा ने खारिज कर दिया। वहीं, जमीन की रक्षा के लिए कांशीडीह जमीन बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया।
इसपर ध्यान आकृष्ट कराने के लिए केंद्रीय जनजातीय आयोग नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, जनजातीय परिषद, मुख्यमंत्री, कल्याण मंत्री व परिवहन मंत्री काे ज्ञापन सौंपा जाएगा। ग्रामीणों ने ऐलान किया कि योजना को रद्द कराने के लिए धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में 60 गांवों के माझी बाबा एवं उनके प्रतिनिधियों के अलावे हरिपदो मुर्मू, मंगल मुर्मू, दीपक मुर्मी, बंगाल सोरेन, मार्शल सोरेन, युवराज टुडू, विपिन चंद्र मुर्मू, परीक्षित मुर्मू, डेमका सोय, बाबू नाग, कृष्णा लोहार, दीपक रंजीत, दिनकर कच्छप, अनूप महतो, दुलाल सिंह आदि मौजूद थे।
15 करोड़ की योजना में चार साल का विलंब
राज्य में भारी वाहन का प्रशिक्षण केंद्र केवल धनबाद में है। इसे देखते हुए राज्य परिवहन विभाग और टाटा मोटर्स ने संयुक्त रूप से प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए एनएच-33 के किनारे कांशीडीह में जगह का चयन किया है। 12 एकड़ जमीन पर तैयार हाेने वाली योजना के लिए 15 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। इसमें प्रशिक्षण के लिए ट्रैक के साथ होस्टल और ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण किया जाना है। योजना 2016 में ही पूरा कर लेना था, लेकिन अबतक इसका निर्माण नहीं हो पाया है।
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