हस्तकरघा, हैंडलूम और खादी से जुड़े उत्पादों के लिए अपनी पहचान बनाने वाला झारक्राफ्ट पिछले 11 महीनों से नियमित एमडी के लिए तरस रहा है। प्रभारी एमडी और सरकार की उपेक्षा के कारण इसकी बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थिति यह है कि झारखंड सरकार की इस कंपनी के लगभग 163 कर्मियों को समय पर वेतन भुगतान मुश्किल हो रहा है।
क्योंकि झारक्राफ्ट के उत्पादों की बिक्री से ही इसके कर्मियों का वेतन भुगतान करने का प्रावधान है। दीपांकर पंडा के दिसंबर 2019 में एमडी पद से हटने के बाद से यहां कोई नियमित एमडी नहीं बना। निदेशक हस्तकरघा और रेशम उदय प्रताप सिंह वर्तमान में इसके प्रभारी एमडी हैं। सीईओ रहीं रेणु गोपीनाथ पणिकर के हटने के बाद से किसी की नियुक्ति नहीं हुई। पहले राज्य सरकार अस्पतालों के लिए कंबल, बेड कवर आदि के निर्माण और खरीददारी पर जोर देती थी। लेकिन कंबल घोटाले की जांच शुरू होने के बाद से वह भी बंद है।
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